तबाही-दीप जांगड़ा

तबाही-दीप जांगड़ा

मैं लूट कै बरबाद हो चल्या ना तेरी आंख मैं स्याही राम
बालकां की तरियां पाली थी तनै कर दी आज तबाही राम

फ़ेर लोग कहैंगे बस फूकै जब हक़ अपणा मैं माँगूँ गा
कद तक अपणे गल मैं राम मैं कर्ज़ की ज्योडी घालूँगा
क्यूकर इब ढूँड़ चलाऊं मैं इब कित तै खाण नै आवैगा
आख़िर कद तक तू राम मेरे ज़मीदार नै न्यूए रूवावैगा
जै हो जाते यें दो दाणे बेटी भी जाती ब्याही राम
मैं लूट कै बरबाद हो चल्या ना तेरी आंख मैं स्याही राम

ना घाट करी सरकारां नै म्हारी छाती पै तिल रगड़े हैं
जब मौका लाग्या तेरा राम तनै ख़ूब कमेरे दरडे हैं
कदे आंधी कदे ओले मारैं कदे होज्या बावले मेघ तेरे
काली माटी तै घड़ राखे तनै लिखें सैं काले लेख मेरे
राजे तै भूल गे प्रजा नै तनै क्यों प्रीत भुलाई राम
मैं लूट कै बरबाद हो चल्या ना तेरी आंख मैं स्याही राम

अपणी फ़सल मनै पूत जीसी पूतां की ढाल या पाली थी
दो घड़ी मैं रेत बणाया राम के मेरी कमाई काली थी
किसा जहर पाल रया भीतर मैं के यू माणस मैं घाट भरया सै
बेशक तू इब राजी होज्या पर पेट बणा तनै ज़ुल्म करया सै
एकला मर जाता भूख प्यास तै तनै क्यों घरबारण लाई राम
मैं लूट कै बरबाद हो चल्या ना तेरी आंख मैं स्याही राम

मौसम होया रंगीन आज तै कई पकौड़े खावैंगे
होज्या तंगी इस ज़मीदारे मैं कित तै दाणे आवैंगे
त्यौहार पड़े सैं पड़े सैं वाणे क्यूकर काम चलाऊंगा
एक बै आकै बतलादे बैरी तनै फ़ेर मिलण ना पाऊँगा
“दीप” मरे पै सब कोसैं तनै कर्ज़ की बलि चढ़ाई राम
मैं लूट कै बरबाद हो चल्या ना तेरी आंख मैं स्याही राम

मैं लूट कै बरबाद हो चल्या ना तेरी आंख मैं स्याही राम
बालकां की तरियां पाली थी तनै कर दी आज तबाही राम

 

दीप जांगड़ा

 

 

 

 

Deep Jangra

मैं दीप जांगरा कैथल हरियाणा का निवासी हुँ। मैं वीर रस का कवि हूँ।

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