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तलाश -सुनील दुबे

                तलाश-

फिर मेरी आखों से आंसूओं की बरसात हुई।
खुशियों की तलाश में गम से मुलाकात हुई।

निकले थे सफर में मंजिल का पता न था।
जिन्दगी का कोई लम्हा हमसे जुदा न था।
अश्कों के साये में जिन्दगी से इक बात हुई।
खुशियों की तलाश में गम से मुलाकात हुई।

सीखते रहे ताउम्र लेकिन समझ नहीं पाये।
कहने को सब अपने थे कोई नहीं पराये।
अपनों से गैर होने की अब सुरुवात हुई।
खुशियों की तलाश में गम से मुलाकात हुई।

जो ख्वाब सजाया था वो पलभर में टूट गया।
जो अजीज था साथी मेरा राहों में छूट गया।
न जाने क्यूँ किस्मत की ऐसी खुराफात हुई।
खुशियों की तलाश में गम से मुलाकात हुई।

✍ सुनील दुबे
बेलवा बाजार, जौनपुर
उ प्र

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