तन्हाई – पूजा चौहान

तन्हाई – पूजा चौहान

जाने कहाँ से कुछ करने की हिम्मत सी आई है

जाने क्यों आज शायद मेरी कोशिश रंग लाई है

चलती थी सबके संग पर क्यों, आज तन्हाई ही मुझ पर छाई है |

पहले तो ये देती थी गम ,कर देती थी आंखें यू नम,

पर पहली बार इसने मुझे अपनी खामोशी की गूंज सुनाई है |

इस तन्हाई ने ही मुझे जीवन की राह दिखाई है

जिंदगी की क्या सच्चाई है इस तन्हाई ने ही मुझे बताई है।

Pooja Chauhanपूजा चौहान
हमदर्द नगर, नई दिल्ली

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