तेरे चरणों की दासी हूँ -नीलम कुशवाह

तेरे चरणों की दासी हूँ -नीलम कुशवाह

न राधा न रुखमणि बनने की चाहत है,
मैं तो बस तेरे चरणों की दासी हूँ कान्हा|
मैं मानती हूँ मेरा कर्म अच्छा नही है,
मैं मानती हूँ मेरा प्यार सच्चा नही है,
फिर भी मैं चाहती हूँ तुझमे डूब जाना|
क्योंकि मैं तो बस………….|
माना कि मेरी सच्ची इबादत नही है,
माना कि मुझको तेरी आदत नही है,
फिर भी चाहती हूँ तेरे संग एक अफ़साना |
क्योंकि मैं तो बस………..|
मैं मानती हूँ मैंने बहुत पाप किया है,
न कभी सांसो में तेरे नाम का जाप किया है,
फिर भी चाहती हूँ ज़िन्दगी तुझपे ठहराना |
क्योंकि मैं तो बस …………|
मैं जानती हूँ तेरी सेवा में करोड़ो खड़े है,
मैं जानती हूँ मेरे गुनाह मेरी इबादत से बड़े है,
फिर भी चाहती हूँ तेरी आशिकी में मर जाना |
क्योंकि मैं तो बस………….|
तू न देख मेरी तरफ पर मुझसे मुंह भी न मोड़ना,
सांसे मेरी छुटे तो छुटे पर साथ तू मेरा न छोड़ना,
बस अब एक ही ख़्वाहिश है कर दे मुझे तू खुद पे फना |
क्योंकि मैं तो बस……………..|

 

   नीलम कुशवाह

कुशीनगर, उत्तर प्रदेश

Neelam Kushwaha

मैं नीलम कुशवाहा कुशीनगर उत्तरप्रदेश की निवासी हूँ। मैं कविताओं के साथ-साथ कहानिया भी लिखती हूँ।

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