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तेरी छाया – नवीन

जब भी तेरी छाया मेरी नजरों से गुजरती हैं,
पल में पहचान जाता हूँ कि कोई तो रिश्ता हैं,
जो आज भी मेरा पीछा करती हैं,
वो और बात हैं हम कभी मिले नहीं,
वो और बात हैं हम कभी जुड़े नहीं,
लेकिन दिल के किसी कोने में आज भी तेरा बसेरा है,
हर जगह तेरी पहरा हैं,
कंही भी कभी भी रोज सपने में आती है,
नही जानता ये सपना हैं या हकिकत,
मगर कुछ तो हैं हमारे बीच,
जो रोज सुबह मुझे जगाती हैं…

Navin Kumar#नवीन

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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