थोड़ा सा मुस्कुरा देना-रजनीश झा

थोड़ा सा मुस्कुरा देना-रजनीश झा

दूर जाते हुए तुमसे
किसी मोड़ पर
शायद तुमसे मुलाकात न हो
आँखों से ओझल न हो हम जब तक
काश इन आँखों से अश्कों की बरसात ना हों।

हासिल क्या किया हमने यहां
कुछ भी ना मिल पाया था।
मन की आंखों से बस देखा हमने
इस दिल में तेरा ही साया था।

अब शिकायत किस से करेंगे हम
हर बातें किसे बताएंगे।
उन हसीं लम्हों को याद कर के
शायद ही कभी मुस्कुरायेंगे।

एक बात थी कहनी तुमसे सनम
इस दिल की धड़कन रुकने से पहले
एक झलक अपनी दिखला जाना
तमन्ना न होगी फिर जन्नत की भी हमें
हमारी साँस थमने से पहले
बस थोड़ा मुस्कुरा जाना।

 

  Rajnish jha 

     रजनीश झा

जमशेदपुर, झारखण्ड

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