तू बस हिसाब रख – बबिता खंडूरी

तू बस हिसाब रख – बबिता खंडूरी

भुला देंगे एक रोज तुझको
तू जरा इत्मिनान रख
अपने एक एक बदलाव का
तू बस हिसाब रख !
अभी मजबूर है आह मेरी
यादों की उन राहों में
कोशिश कर आगे बढ़ेंगे
तू जरा ऐतबार रख
अपने बदलते लफ्जों का
तू बस हिसाब रख !
कोशिश लाख की मैंने संभाले
संभल जाएं दिलों के रिश्ते
आज टूटे बिखरे एहसास हुए
तेरी नजरों में सस्ते !
लेकर चले जाएंगे
एहसासों को खुद संग
तू बस इत्मिनान रख
अपने भूले वादों का
तू बस हिसाब रख।

Babita Khanduriबबिता खंडूरी
फरीदाबाद, हरियाणा

Babita Khanduri

मैं बबीता खंडूरी फरीदाबाद हरियाणा की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ।

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