तुझे हंसाता रहा -चेतन वर्मा

तुझे हंसाता रहा -चेतन वर्मा

तेरे झूठ को मैं सच मानता रहा
तुझे हंसाता रहा
तेरी बातें सुन-सुनकर
खुद अश्क बहाता रहा…

अक्सर अहमियत खो कर अपनी
तेरे दिल को अपना दिल बताता रहा
लगना चाहा गले से तेरे
गैरों की बाहों में जाते चुपचाप देखता रहा…

इश्क ना हो रब्बा इस कदर
मर जाऊंगा तेरे बगैर
होकर बर्बाद तेरे प्यार में
ठोकर पर ठोकर खाकर भी
तुझे अपना बताता रहा…
तुझे हंसाता रहा
तुझे हंसाता रहा ….

 

           चेतन वर्मा
बूंदी , राजस्थान

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