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तुम बड़ी अजीब हो माँ – शुभम् लांबा

माँ….
तुमने जन्म दिया मुझे और
मेरी रूह को एक नाम दिया।
अपनी जिंदगी का सब कुछ मेरे नाम किया।

इतनी पीड़ा सही मेरे लिए और
मुझे कभी दर्द का एहसास तक नहीं होने दिया।

सिर्फ व्रत रखा मेरे लिए और
मुझे कभी भुख का एहसास तक नहीं होने दिया।

इतनी परवाह रखी मेरे लिए और
मुझे कभी बिमार तक नहीं होने दिया।

सच कहूं?
तुम बड़ी अजीब हो माँ।
सिर्फ प्यार किया मुझे, कभी इंकार नहीं किया।
देखभाल की हमेशा, कभी इजहार नहीं किया।
वक्त दिया मुझे, कभी एहसान नहीं किया।
करूणा दिखाई हमेशा, कभी क्रोध नहीं किया।
मेरी रूह को एक नाम दिया।
अपनी जिंदगी का सब कुछ मेरे नाम किया।

एक बात कहूं?
तुम पास हो तो मैं हूँ सुरक्षित।
तुम दूर हो तो मैं हूँ असुरक्षित।
तुम ही रब हो मेरा‌ और तुम ही सब हो मेरा।
तुमने जन्म दिया मुझे और
मेरी रूह को एक नाम दिया।
अपनी जिंदगी का सब कुछ मेरे नाम किया।

माँ हमें नौ महिने पेट में रखती है जन्म के लिए।
पिता पूरी जिन्दगी दिमाग में रखता है भविष्य के लिए।
तुम दोनों मेरी जिंदगी में हो,
मेरी आत्मा, मेरी प्रार्थना और मेरी प्रेरणा के लिए।
….$❤️….✍️

  शुभम् लांबा

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Subham Lambha

Subham Lambha

मैं शुभम लाम्बा गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवि हूँ। मैं B. Tech Mechanical इंजिनीअर हूँ। और वर्तमान मे JSW Steel Ltd. Karnataka मे कार्य कर रहा हूँ।

1 thought on “तुम बड़ी अजीब हो माँ – शुभम् लांबा”

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