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Udne do mujhe… Poem By Pranay Kumar

“उड़ने दो मुझे”

भले ही रख लो डोर तुम अपने हाथ में,
मगर उड़ने दो मुझे आकाश में.

भले ही पता हो मेरा पाताल में,
मगर घर हो मेरा आकाश में.

भले ही हार हो जाए मेरी,
मगर खेल लेने दो मुझे इस जहान में.

भले ही थक गया हूँ मैं,
मगर चल लेने दो, दो कदम मुझे वीरान में.

भले ही न रहूँ मैं,
मगर गूंजने दो मेरा नाम इस संसार में.

रख लो डोर तुम अपने हाथ में मगर उड़ने दो मुझे आकाश में .

प्रणय कुमार
कुर्सेला ( कटिहार)
MOB:- 8809015520

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