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उपमा तुला देताना – विशाल परशुराम मुळे

उपमा तुला देताना
मन होत वेडं बावर
कशाची द्यावी उपमा
विचार हा चौफेर

उपमा तुला देताना
मी होतो विचारी
शब्द येतात ओठांवर
तिथेच विरतात विचारी

उपमा तुला देताना
सुचतं खूप काही
शब्द वाटतात अपुरे
चालते मात्र कवितेची घाई

उपमा तुला देताना
सर्व वाटे फिके
केली जरी तुलना
वाटे तोंड असुनी मुके

उपमा तुला देताना
वेळ पडतो कमी
देऊ मग कधीतरी
ठेवतो शब्दांची हमी

उपमा तुला देताना
आठवता आठवेना
तुझ्या सुंदरतेला
शब्दही सापडेना

उपमा तुला देताना
आठवते फक्त तू
सर्वगुणसंपन्न अशी
स्वप्नसुंदरी तू

vishal muleविशाल परशुराम मुळे

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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