वांचन की संख्या-दिशा शाह

वांचन की संख्या-दिशा शाह

आज कल दिन पर दिन वांचन की संख्या कम होती जा रही है . लोग अक्षर मोबाइल में ही व्यस्त होते है की पढ़ने का समय ही नहीं होता है . इंसान अपने में ही व्यस्त होते है . वांचन आज कल बोहोत कम होते जा रहा है .किसी को किताब पढ़ना अच्छा ही नहीं लगता जब से स्मार्ट फ़ोन टीवी लैपटॉप कंप्यूटर. आ गए है तब से किसी को भी अख़बार पढ़ने में , किताब पढ़ने में रूचि बोहोत कम हो गयी है . बोहोत कम युवा अख़बार पढ़ते है . हिंदी में तोह कोई पढ़ना पसंद ही नहीं करता . पढ़ना सब को बोरिंग लगता है . ये नहीं जानते है की इससे ज्ञान भी बढ़ता है और इंसान का iq लेवल भी बढ़ता है . दिन पर दिन व्हाट्सअप , फब, यूट्यूब में अड़े हुए होते है . लोग ये फिजूल के व्हट्सप फालतू सन्देश . समय का दुरूपयोग होने वाला सब सन्देश पढ़ते है . कम से कम सोशल वेबसाइट से तोह पढ़ा जा सकता है सुविचार भी पढ़ सकते है चाणक्य ,एपीजे अब्दुलकलाम, स्वामी विवेकनंद महान विद्वानों के कितने सुविचार है जो हम पढ़ सकते है . हर रोज कुछ न कुछ पढ़ना आवश्यक होता है हमारे iq लेवल को बढ़ने के लिए .अख़बार , किताब पढ़ने से देर सारा ज्ञान प्राप्त होता है . इसलिए जो भी प्रेरणा दायक कुछ जानने समझने वाले न्यूज़ , दैनिक भास्कर ,सुविचार , या कोई भी मन पसंद कहानी , जिसे कुछ समझने सिखने जाने को मिले ,जो पसंद हो वो हरोज पढ़ना चाहिए. इससे ज़िन्दगी में बोहोत फ़ायदा होता है . हम ज़िन्दगी में उच्च ज्ञान के साथ आगे बढ़ते है .

   Disha Shah    दीशा शाह
   पश्चिम, बंगाल, कोलकाता

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