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वनों की पुकार-महा-जादू-मस्ती

वन हमसे ये कहता
मत काटो पेड़ हमारे
एक पेड़ तुम रोज लगाओ
खुशियां दूंगी सारे

यह चाहत है मेरी कि
मैं पेड़ो से सज जाऊं
शुद्ध हवा देकर जग में
औरों की जान बचाऊं

मेरी ही आंचल में रहते
पशु पक्षी नित न्यारे
नदियां पर्वत वनस्पति
मै ही दूंगी जग सारे

लोगो से विनती है मेरी
तुम याद करो अपना जीवन
मुझको भी जिन्दा रहने दो
न नष्ट करो तुम मेरा तन

ये सोच ले मानव कि तू भी
मेरे बिन न रह पायेगा
मै ही न रहा जो इस जग में
जीना दूभर हो जायेगा

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