क्या यही है पुरुष-सुषमा मलिक

क्या यही है पुरुष-सुषमा मलिक

अहं के नशे में चूर करके खुद को,
पुरुषत्व की पहचान बताता है…..
क्या यही है पुरुष…..??
हसीं छीनकर के नारी की उसे,
खूब खून के आंसू रुलाता है…..।
जुर्म ढाता नारी पर बोल पड़े,
तो उसे वो बेहया बताता है…….।।
क्या यही है पुरूष….??
भोगकर नारी को फिर उसके,
चरित्र पर लांछन लगाता है……।
अगर विरोध करे नारी कभी,
तो उस पर वो हाथ उठाता है….।।
क्या यही है पुरुष….??
कठपुतली बना उसे हाथो की,
उस पर मर्दानगी जताता है…..।
डर के साये में रहती है वो,
गर्दन तक हाथ पहुँचाता है……।।
क्या यही है पुरुष….??
धिक्कार ऐसे पुरुषत्व को,
जो नारी का सम्मान नही करते…
उनसे तो वो किन्नर भले,
जो किसी का अपमान नही करते..।
कब तक बर्दाश्त करेगी ये,
“मलिक” अब गरज उठेगी….
कितने मर्द है बता दे वो,
जो ये काम तमाम नही करते…।।।।

 

   सुषमा मलिक
रोहतक ,हरियाणा

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