ये इन्सा तेरी कहा गई इंसानियत – माधव मुळे

ये इन्सा तेरी कहा गई इंसानियत – माधव मुळे

इन्सानोकी भीड में
इन्सानियत गुम हुई
कोई सच्च्या आशिक न रहा
चाहत सबकी कम हुई

आलिशान बंगलोकी
बस सभिकी खॉंईश है
ब्रँन्डेड चिजे हि अब
बनी सभी कि चॉइस है

घमण्ड कि दलदल में
चुर तू हो जाऐगा
अकेला पड जायेगा तू जब
धोका अपनोसे खाऐगा

ये इन्सा अपने कर्मो का
फल एक दिन तू पाएगा
नफरत कि इस आग में
जितेजी मर जाएगा

madhav muleमाधव मुळे

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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  • Very nice Mr. Madhav Muley

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