ये रिश्ता क्या कहलाता है? – शुभम लाम्बा

ये रिश्ता क्या कहलाता है? – शुभम लाम्बा

अजीब सा रिश्ता है ये।

तुम्हें मुझसे बातें करके अच्छा लगता है,
मुझे तुम्हारी बातें सुनकर अच्छा लगता है।

तुम्हें मुझसे झगड़ना अच्छा लगता है,
मुझे तुम्हें मनाना अच्छा लगता है।

तुम्हें मुझसे रुठना अच्छा लगता है,
मुझे तुम्हें डांटना अच्छा लगता है।

फिर ये रिश्ता क्या कहलाता है?
पर जैसा भी है, बड़ा अनमोल है।

तुम्हें मेरी आदतें पसंद हैं,
मुझे तुम्हारी शरारतें पसंद हैं।

तुम्हें मेरी हंसी पसंद है,
मुझे तुम्हारी खुशी पसंद है।

तुम्हें मेरी अच्छाई पसंद है,
मुझे तुम्हारी सच्चाई पसंद है।

फिर ये रिश्ता क्या कहलाता है?
पर जैसा भी है, बड़ा अनमोल है।

Subham Lambaशुभम लाम्बा

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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