ये वक़्त चला जायेगा – निशांत कुमार “नयन “

ये वक़्त चला जायेगा – निशांत कुमार “नयन “

ये वक़्त चला जायेगा ,
तू यूँ ही-रुक कर न सोच ….!

ये मंज़िल दूर नज़र आएगा ,
तू यूँ ही -थक कर न सोच …!

ये रास्ते- मुसाफिर को अपना कहाँ मानते हैं,
जो कल गुजरा था इनकी राहों से ,
ये उनको कहाँ पहचानते हैं ,
तू इनकी बेवफाई के बाड़े में ,
यूँ उलझ कर न सोच….!

ये वक़्त चला जायेगा ,
तू यूँ ही-रुक कर न सोच ….!

ये वक़्त कहाँ रुका हैं ,
कभी किसी अपनों के वास्ते ,
हर बार बदल देता हैं ,
न जाने क्यों रास्ते ,
तू इनकी बदलती रंगो के बाड़े में न सोच …!

ये वक़्त चला जायेगा ,
तू यूँ ही-रुक कर न सोच ….!

Nishant Kumar Nayanनिशांत कुमार “नयन “

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