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यह भवसागर है झूठा -सुनीता प्रजापत

ये भवसागर है झूठा,
यहां ना कोई है अपना।
हे मूढ़ मानव सोच जरा तू,
इस तथ्य को तू अपना ‌‌‌।

आया है इस भव में क्यूं,
तुझे है क्या यहां करना।
ये भव तो है स्वार्थ भरा,
इसमें है ना कोई तत्वा।

जाति का है भेद है यहां,
इसे ना कोई मिटाता ।
हर रिश्ता- नाता है झूठा,
बस यही है मेरा कहना।

हर मानव में दम्भ भरा है,
वह इसमें चकनाचूर है।
पाखंड कपट इतना भरा,
सच झूठ का ना है पता ‌ ।

हे मानव अब सुन जरा,
कर ले अब तो कुछ भला।
इक दिन तुझको जाना है,
देना उसे है जवाब वहां।

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Sunita-Prajapat

Sunita-Prajapat

मेरा जन्म 26/8/1995को जयपुर जिले के गांव भीवपुरा में हुआ था ।माता का नाम श्रीमती कपुरी देवी और पिता का नाम श्रीमान जगदीश प्रसाद प्रजापत है । मैंने एक गरीब परिवार में जन्म लिया था ‌। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, अच्छे आवास की सुविधा न थी, लेकिन फिर भी मेरे माता-पिता ने स्नातक की पढ़ाई कराई है। स्नातकोत्तर की पढ़ाई मैंने ससुराल में आकर की है। यहां भी मुझे अच्छा परिवार मिला है।

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