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युवती-अजय-प्रताप सिंह-

यौवन की दहलीज देख काया में परिवर्तन ।
खो बैठी कामुक हो वह आत्म नियंत्रण ॥
सागर सा तूफान उठा मन उसका मचला,
मदमस्त हुई वह देख भरी यौवन की मदिरा,
नहीं पता कब छलक उठेगा पैमाना,
सोच रही कैसा आया जीवन में सावन ॥ खो …
बनी चटक की कली लिए ज्वाला अंतस्थल,
उन्माद भरी खुशबू फैल किया भंवरों को पागल
क्या जाने मासूम यहां निष्ठुर कांटे हैं,
पता नहीं कब पकड़ लिया कांटो ने दामन ॥खो
नग्न हुई तब चिल्लाई कांटो में बदन छुपाया,
टूट गई सब पंखुड़ियां बिखर गई कोमल काया,
पश्चाताप से लगी फफकने ,आंखों से आंसू टपक पड़े,
बेकल होकर सोच रही कहां गया अद्भुत यौवन ॥ खो …..
ना खुशबू ना रूप रंग ना वह कोमल गात रहा,
क्यों बिखर गई वह क्या जाने इसका कारण अज्ञात रहा,
लिए मृत आत्मा गात घूमती फिरती है,
सीने की ज्वाला फूँक गई उसका तन मन ॥ खो बैठी …
अहम उसे था ईश्वर की अद्भुत कृति होने का ,
स्वयं चुना था अवसर उसने कांटो संग सोने का,
एकमात्र मौका जीवन का गंवा चुकी थी,
बिखरी कलियाँ कभी बनी है क्या आकर्षण ॥ खो बैठी कामुक हो वह आत्म नियंत्रण ॥

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ajai-pratap-singh

ajai-pratap-singh

My name is Ajai pratap Singh. M . A . B.Ed. 1996 ( c c s uni . Meerut ) Unemployed . I am a simple farmer.I lives in charora .I am p.t.a in siksha sadan inter College jatpura.

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