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ज़िन्दगी-देवेंद्र अवस्थी

शायद याद तो होगा तुमको
मैं हैशटैग ज़िन्दगी लिखता था
जब भी कुछ लिखना होता
अन्त में मै ज़िन्दगी लिखता था
एक दिन जब तुमने पूछा था
किसे ज़िन्दगी लिखते हो
मैने तुम्हें बताया था ना
क्यूँ इतना शिद्दत से पढते हो
फ़िर आज मेरे उस हैशटैग को
क्यूँ चुरा के हो तुम खा गयी
क्या मेरा दिल कम था जो
कलेजा भी चबाने आ गयी……

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