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जिंदगी जीने की कोशिश में[email protected]

सूरज की नई किरणों की तरह
उसने भी खुद में उम्मीद की किरण जलाई होगी।।
जिंदगी जीने की कोशिश में
जब वो खुद से ही हार गई होगी ।।
कभी धूप कभी छांव में
वो भी तप कर आयी होगी ।।
अपने सपने पूरे करने के लिए
उसने भी खुद को तपाई होगी ।।
हर शाम घर देर आने पर
वो भी घरवालों से डाट खाई होगी ,
फिर भी सबसे छुपकर के….
अपने आंखो को न जाने कितनी खुशियां दिखाई होगी ।।
चार राक्षसों के भूख के कारण..
उसे अपने आत्मसम्मान कि बली चढ़ानी पड़ी ,
न जाने कितना दर्द हुआ होगा
जब दिल को ही चोट खानी पड़ी ।
जिंदगी जीने की कोशिश में….
उसे अपनी ही जान गवानी पड़ी ।।
इंसानियत को शर्मसार करने वालों
न जाने तुमने कैसे रात बिताई होगी ।।
एक फूल को कुचलकर अपने फूल जैसी बेटी को तुमने कैसे गले लगाई होगी ।।
गलती क्या थी उसकी..
बस जीवन जीने कि उम्मीद लगाई थी।
कुचल कर उसकी जीवन को तुमने ,
कैसे अपने घरवालों से नजरें मिलाई होगी ।।
क्या तुम्हे दर्द नहीं हुआ ….
जब वो अपने आत्मसम्मान के लिए
तुमलोगो के सामने गुहार लगाई होगी ।।
जिंदगी जीने की कोशिश में
तुम लोगो के सामने उसने अपनी ही जान गवाई होगी ।।।।

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