कन्यादान (बिन मां बाप) – महेश नेगी

कन्यादान (बिन मां बाप) – महेश नेगी

पूरे घर मे शादी की सह्नाईयां बज रही थी, अगले ही दिन शालू की शादी है, मै (नैना) घर की बालकन्नी मे खडी होकर चाय कि चुस्कियां लेते हुये अपने अतित मे खोयी हुई थी, और सोच रही थी की कुछ ही दिनो मे शालू भी इस घर से कहीं दूर अपने पाति के घर
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छन्द – निशा निक

आप ‘छन्द’ शीर्षक देख कर सोच रहे होगें की इस लेख में क्या होगा… आप ही नही मैं भी ये सोच रही हूँ की इस लेख को सुरू कहाँ से करू… क्योकि इस लेख में बहुत कुछ आप सभी से साझा करना चाहति हूँ… हर उस शीर्षक को रखना चाहति हूँ जिन्हे सुन्दरता के नाम
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काश – मीना चंदेल

प्रिय रमेश, जब तक आपको ये पत्र मिलेगा मैं आपकी जिन्दगी से बहुत दूर जा चुकी होऊंगी | आज जीवन के अंतिम समय में मैं आपको अँधेरे में नहीं रखना चाहती और न ही ये चाहती हूँ कि मेरे इस इतने बड़े फैंसले का कारण आपको लोगों से पता चले | आज बहुत अफ़सोस के
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दिले नादाँ तुझे हुआ क्या है आखिर इस मर्ज की दवा क्या है ??? – मीना चंदेल

दिले नादाँ तुझे हुआ क्या है आखिर इस मर्ज की दवा क्या है ??? किसी शायर ने क्या खूब कहा है ….माना के मरकर जीवन से छूट जाओगे मरकर भी जो सुकून न मिला ‘जानिब’ तो कहाँ जाओगे ’ जिन्दगी की भाग दौड़ में आज इंसान किसी शायर ने कहा था ‘ माना मरकर जीवन
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किसान अन्नदाता – श्याम कुँवर भारती

बिरजू यादव रामपुर गांव का एक छोटा सा किसान है। खेती बाड़ी में में नुकसान होने की वजह से वह पंजाब चला जाता है और वहाँ एक बड़े किसान मनजीत सिंह के कृषि विभाग में नौकरी करने लग जाता है जहां उसे रहने-खाने की सुविधा के साथ पाँच हज़ार प्रतिमाह तनख्वाह पर काम मिलता है।
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मेरी मौत – अमनदीप

यह जरूरी तो नहीं कि मौत सिर्फ जिस्म की हो। मैंने अपनी रूह को दम तोड़ते हुए देखा। मैं खुद पर बेतहाशा वार कर रहा था। बहुत नफरत थी मुझे खुद से। मेरे जख्मों से खून बह रहा था। आंखों के आगे हल्का-हल्का सा अंधेरा हो रहा था। ” मोटे क्या है? किसी के पीछे
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किसान भाई – पुष्कर कुमार

भारत हीं नही संम्पूर्ण विश्व के अमीर लोग,जो एेसो-आराम की जिंदगी जीते है,एयर-कंडिसन से कभी बाहर तक नही निकलते,मोटर कार या हवाई जहाज मे घुमते है । अपने आप को अमीर बताते है,जो कि वास्तव मे अमीर है नही ,यह तो दुनिया के लिए दिखावे मात्र है। हद तो इस बात की है कि कुछ
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” मेरे शब्द मेरा हथियार ” – अमनदीप

अगर मैं युद्ध में एक सिपाही होता तो मैं अपनी आखिरी सांस तक लड़ता। मैं हाथ में तलवार लिए होता तलवार से बूंद बूंद करके खून बह रहा होता। मैं एक खूंखार भेड़िए की तरह दुश्मन के सैनिकों के खून से खेल रहा होता। कुछ खून मेरे जख्मों से भी बह रहा होता। पर क्या
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“वो बदले या बदली मेरी जिंदगी – जितेंद्र कुमार शर्मा

एक वक़्त था जब उनके लिए मेरे पास और मेरे लिए उनके पास वक़्त ही वक़्त था ।।आज में तो इंतज़ार करता हु सायद उनके पास वक़्त की कमी हो गयी है ।। एक पल भी बात नही होने पर जान सी निकल जाती थी उसकी ,आजकल हफ़तो तक बात नही होती ।। जिसके लिए
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रागिनी – बृज

आज मेरे यार की शादी है , मेरे यार की शादी है ,मेरे दिलदार की शादी है ……….आर्केस्टा की प्रसिद्ध धुन पर डांस के नाम पर उछलते कूदते युवा समूह ,ट्यूब लाइट की रोशनी में जगमगाते गाँव की पगडंडीयो से होते हुए दुल्हन के दरवाजे की ओर बढे जा रहे थे | थोड़ी देर में
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