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Category: कहानियाँ

सौदागर और कप्तान -अखिलेश पटेल

एक सौदागर समुद्री यात्रा कर रहा था एक रोज उसने जहाज के कप्तान से पूछा “कि तुम्हारे पिताजी की मृत्यु कैसे हुई”? कप्तान ने कहा”

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हरजाना -सुनील कुमार शर्मा

जब फत्तु की मुर्गी का गला मरोड़कर, थैले में ले जाते हुए रमलु रंगे हाथों पकड़ा गया। फत्तु ने तुरंत गांव के पीपल के नीचे

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तड़फती नारी -रुखसार अंसारी

स्ंक्षिप्त सारांश-अपने परिवार के चार सदस्य खोजाने के गम में, तड़फती जमुनादेवी पर, जगन्नाथ कोठारी ने अपने पु़त्र पुलिश इंस्पेक्टर रंजीत कोठारी के साथ मिलकर, जमुनादेवी के देवर श्यामबिहारी को उसी के पति रामदेव से मरवाकर, फिर मास्टर दीनदयाल के लड़के के मडर में जमुनादेवी को जेल भिजवाने की पुरजोर कोशिश की। लेकिन जब जमुनादेवी इनके चंगुल से निकल कर, एक जनप्रतिनिधि जग्गनलाल देशमुख के लड़के बाजीराव के पास न्याय के लिए अरदास लगाने पहुँची ,तो उसने भी मदद करने के बजाय, जमुनादेवी पर जुल्मढाने के लिए, रेप करने की कोशिश की। लेकिन जमुनादेवी ने हार न मानते हुए, सवूत के आधार पर इनको सजा दिलाकर,अपने पति के साथ बाइज्जत बरी होकर कामयावी प्राप्त की।पात्र-परिचय-जगन्नाथ कोठारी-खलनायक,, रंजीत कोठारी-जगन्नाथकोठारी का लड़का तथा पुलिश इंस्पेक्टर,, मिर्जाहसन-एक वकील तथा जगन्नाथ कोठारी की लड़की,, आबीर हसन-मिर्जाहसन के पति,, जमुनादेवी-फेंक्ट्री मजदूर रामदेव की पत्नी,, श्यामबिहारी-रामदेव का भाई व किसोरी का पति तथा फेक्ट्री मजदूर ,,पारो-रामदेव तथा श्यामबिहारी की मॉ,, दीनदयाल-एक अध्यापक,, बाजीराव देशमुख-खलनायक तथा मंत्री जग्गनलाल देशमुख का लड़का,, अवन्त देशमुख-एक जज तथा मंत्री जग्गनलाल का लड़का,,।                     -किसी गॉव के पास एक कपड़ा मिल है जिसके कुछ कर्मचारी अपनी ड्यूटी समाप्त कर अपने-अपने मकान की तरफ जा रहे हैं। उन्हीं में से कुछ कर्मचारियों ने अपने साथी रामदेव तथा श्यामबिहारी से रास्तें में चलते-चलते कहा-,,भाई रामदेव अबकी वार तो इस ग्राम पंचायत चुनाव के लिए आप खड़े हो जाइए,,। ,,मेरे भाइ एक छोटे लेवल का कर्मचारी होकर, मैं इस काम को कैसे कर सकता हूँ।ये सब मेरे बस की बात नहीं,, उन लोगों को रामदेव ने जवाब दिया । ,,तो फिर भाई रामदेव, अपने भाई श्यामबिहारी को ही खड़ा कर दीजिए,, दूसरे व्यक्ति ने रामदेवकी बात को काटते हुए कहा। ,,मेरे भाई ऐसे काम के लिए तो, मैं कभी भी अपनी रजामन्दी नही दे सकता। क्या तुम्हें नही पता कि सामने खड़ा होने बाला जगन्नाथ कोठारी कितना चतुर चालाक किस्म तथा दुष्ट प्रकृति का आदमी है।इसके सामने तो हम कभी भी खड़े नही हो सकते। देखा पिछली वार कितनी गुन्डा गर्दी करके, इसने मास्टर दीनदयाल को चुनाव में हरा दिया था। जबकि मास्टर दीनदयाल के इस पर इतने अहसान हैं कि उन्हें ये उतार भी नही सकता। और फिर मास्टर दीनदयाल ने ही इसे राजनीति सिखाकर यहॉ तक पहुँचवा दिया। और फिर लड़के रन्जीत को पुलिश की नोकरी दिलाकर उसे दारोगा बनवा दिया,, पास में खड़ा रामदेव का भाई श्यामबिहारी बोला। ,,मेरे भाइ श्यामबिहारी ,मास्टर को चुनाव लड़ाने में हम इसलिए मार खा गए कि हममें से ही एक हराम खोर हमारा कर्मचारी, इन दोनों के बीच चुनाव में खड़ा हो गया।जिसके कारण हमारे वोट दो हिस्सों में बट गए और मास्टरजी को हारना पड़ा। लेकिन मेंरे भाइ अब हम, ऐसा दुवारा नही होने देंगे। क्यों कि अब हम किसी भी कीमत पर तीसरा व्यक्ति खड़़ा नही होने देंगे,, बीच में बात को आगे बढ़ाते हुए दूसरे व्यक्ति ने कहा। ,,मेरे भाइ रामदेव, फिर तो आपको खड़ा होना ही पड़ेगा,, पास में खड़़ा एक अन्य व्यक्ति बोला । रामदेव अपने भाई श्यामबिहारी के साथ ये कहते हुए आगे बढ़ जाता है कि ,,मेरे भाइ देखा जायगा और फिर देखते हैं समय क्या कराता है,,। -जगन्नाथकोठारी ने अपने मकान में अपनी लड़की मिर्जाहसन से कहा-,,बेटी मिर्जाहसन तूने वकालत की डिगरी तो प्राप्त करली, लेकिन भविश्य में अब तेरा क्या कुछ करने का इरादा है,,। ,,पिताजी मुझे भी वही सब कुछ करना है, जो सभी लोग करते आए हैं,, लड़की मिर्जाहसन ने पिता को जवाव दिया। ,,अब हमारी बिटिया ,आपस में लड़ने झगड़ने वाले लोगों का झगड़ा विबाद, अदालत से समाप्त करा दिया करेगी,, इसी बीच जगन्नाथ कोठारी की पत्नी बोली। ,,पिताजी अब मेंरा काम और पेशा यही हुआ करेगा कि कोई दवंग व्यक्ति किसी कमजोर व्यक्ति को न सता सके,, बेटी मिर्जाहशन ने अपने पिता को जवाव दिया। ,,बेटी अपने लोगों का तो जरा खयाल रक्खा करना,, जगन्नाथकोठारी बोला। ,, पिताजी ये अपने पराये क्या होते हैं,, पिता से प्रश्न करते हुए  मिर्जाहशन बोली। ,,बेटी अपने वो होते हैं जिनसे कुछ सम्वन्ध होता है। जैसे मैं तेरा पिता जगन्नाथकोठारी, तेरा भाई रंजीतकोठारी जो पुलिश की नोंकरी जोइन करने जारहा है,, जगन्नाथकोठारी ने अपनी लड़की मिर्जाहसन से कहा। उसी समय रंजीतकोठारी ने उन दोनों बाप बेटी के पास आकर कहा-,,पिताजी मुझे भी बहिन मिर्जाहसन के साथ अपनी ड्यूटी पर जाने का आशीर्बाद दीजिये,,। ,,तुम दोनों बहिन भाइयों को मेरा भरपूर आशीर्बाद है,, जगन्नाथकोठारी ने दोनों बहिन भाई को आशीर्वाद देते हुए कहा। फिर जगन्नाथ कोठारी दोनों बहिन भाइयों को मकान के दरबाजे तक बिदा करने आता है। बहिन भाई गाड़ी में बैंठ अपनी ड्यूटी पर चले जाते हैं।अपने लड़के लड़की को विदा करने के तुरंत बाद, जगन्नाथकोठारी को सामने से मास्टर दीनदयाल अपनी तरफ आता हुआ दिखाई देता है, जगन्नाथ कोठारी ने मास्टर दीनदयाल से नमस्कार करते हुए कहा-,,कहिए मास्टरजीं आप कैसे हैं,आप हमारे पाठशाला के गुरू नही हुए तो क्या हुआ , लेकिन राजनीति  सिखाने वाले गुरू तो आप ही हैं। और फिर आपने इस जगन्नाथकोठारी को, पाठशाला में नही पढ़ाया, तो ना सही, लेकिन हमारे बेटे रंजीत को तो आपने ही ने पढाया है।                                                                                                  पेंज-2इस नाते आप हम दोंनों बाप बेटे के गुरू तो हैं ही,,। ,,हॉ जगन्नाथ इस बात को तो आप सत्य कहते हो,, मास्टर दीनदयाल ने  जवाब दिया ।,,मास्टरजी आप हमसे चुनाव में क्या हारे, हमसे हमारा हाल चाल पूछना भी भूलगए,, जगन्नाथ कोठारी मास्टर दीनदयाल से बोला। ,,कोई बात नही जगन्नाथकोठारी, कभी-कभी गुरू,गुड़ और चेला शक्कर बन जाता है। राजनीतिक गुरू मास्टर दीनदयाल ने, शिष्य जगन्नाथकोठारी को, चुनाव लड़ना सिखाया, तो चेले जगन्नाथ ने गुरू दीनदयाल को ही हरा दिया, लेकिन कोई बात नही जगन्नाथकोठारी राजनीति में ये सब चलता है,, मास्टर दीनदयाल ने  जगन्नाथ कोठारी को जवाव दिया ।-इधर एक औरत बिजयावती अपनी पड़ोसन पारो के मकान पर आती है। उधर पारो ने अपनी पड़ोसन  बिजयावती के  पहुँच ते

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बड़ी बहू- डॉ सरला सिंह स्निग्धा

  “अरे सुनती हो अम्मा! सोनू मोनू के लिए बड़ा अच्छा रिश्ता मिल रहा है।” राम प्रसाद जी ने मां को बड़ी प्रसन्नता से  बताया।

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काफिर- सुनील कुमार शर्मा

आगरे के किले में कैद शाहज़हां, किले की ऊपर वाली मंजिल पर एक झरोखे में खड़ा ताजमहल को निहार रहा था। दूर यमुना के किनारे

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Hindi
Deepak-Kumar

पत्र चुंबन

“पत्र चुंबन” गुप्ता जी सुबह-सुबह नदी किनारे टहलने गए। “गुप्ता जी आज क्या है?” उनके मित्र रामदेव जी ने पूछा। “आज…ओह… आज तो भारत और

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