अटल जी की कहानी-दीशा शाह

अटल जी की कहानी-दीशा शाह

आज हमने साहित्यकार , कवी , पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाज  पायी जी को हमेसा के लिए खो दिया  है . पुरे साहित्य जगत में मायुशि का माहौल छा गया है . अटल बिहारी बाजपेयी अटल थे . कभी हार नहीं मानते थे . वो स्वाभाविक , बोहोत अच्छे थे , सब के
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रुपया, शोहरत और पत्नी- आनन्द मिलन

मनुष्य को जीवन जीने के लिए मिलता है चाहे वह जिस तरह भी जिए | आदमी के पुरे जीवन में तीन ही तमंना होता है | पहला रुपया, दूसरा शोहरत और तीसरा पत्नी | अब जरा रुपया के बारे में ठीक से समझ ले, फिर शोहरत और पत्नी के बारे में बात करेंगे | रुपया
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किराये का मकान-आनन्द मिलन

किसी को क्या पता कि कोई उससे कितना प्यार करता है | मैं तो आज भी आस लगाये बैठें है उसकी आने की, लेकिन क्या पता वह कहाँ खो गई ? सोचता हु उसकी तो आदत सी हो गई है, मकान खाली करवाने की ? लेकिन मैं क्या करू ? बड़ी मुश्किल से एक घर
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देश के रक्षक-दीशा शाह

देश के रक्षक कोन है ये तोह सब को पता है , फौजी है .एक फौजी अपनी जान दाव में लगा कर सब की जान बचाता है . आज हम सुरक्षित है , सिर्फ और सिर्फ भारतीय सेना के वजह से . आज हम को जहा जाना होता है सब जगह जाते है हम बिना
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शराब-आनन्द मिलन

आज के कलयुग में अगर अमृत के समान दूसरा कोई चीज है तो वह है शराब जिसके बूंद बूंद में वो मस्ती है कि पीने वाले ही बताए | मैंने पीया तो नहीं, लेकिन सुना जरुर है कि सात फेरे लेने के बाद भी पत्नी छोड़ कर जा सकती है | चाँद तारों की कसम
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उस परम आनन्द को पाने का रास्ता-गुंजेश शर्मा

इस बात को समझने के लिए कुछ प्रश्नों का उत्तर जान लेना बहुत ही आवश्यक है। आखिर खुशी ही आनंद ही हमे क्यों चाहिए? संसार मे जितने भी लोग ,पशु,पक्षी,जानवर सभी का मकसद एक ही है खुश रहना ! जाने या अनजाने में। बस एक ही मकसद खुश रहना आंनद रहना। भले ही हम इस
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मुझे माँ चाहिए-3-दीपक शर्मा

बीती बातें सोचते सोचते उसकी आंखें नम हो गईं।अचानक उसे अपने लाल की याद आयी जो गुस्से में बिना खाना खाये ही चादर ओढ़ के सो गया था।वो थाली लेकर उसके पास जाकर बैठ गयी।”क्या हुआ मेरे लाल,कैसे उदास होकर लेटा है?” क्या हुआ मेरे लाल?जैसे तुमको तो कुछ पता ही नहीं?वो चादर के अंदर
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जूती- नुजहत राना रूही

वह अभी सरकारी स्कूल से लौटी है । आते ही उसने किताबों की झोली एक ओर उठा कर रख दी और अपनी जूती के बक्से को उठा लाई । उसने उसमें से अपनी चमचमाती जूती निकाली । ‘अरे! यह कितना सुंदर है । यह दो नंग इसके ऊपर बने फूल पर जड़े है । कैसे
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मुझे माँ चाहिए-2-दीपक शर्मा

.घर पहुँचते ही उसने अपना बस्ता कन्धे से उतार के पलंग पर डाल दिया और चादर ओढ़ कर लेट गया।अपने लाल का ऐसा बर्ताब देख वो समझ चुकी थी कि आखिर माज़रा क्या है?मगर वो भी बेचारी क्या करती?जब तक उसके पति ज़िन्दा थे तब तक उन दोनों ने अपने लाडले बेटे की हर इच्छा
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मुझे माँ चाहिए-1-दीपक शर्मा

आज फिर उसके साथ के पढ़ने वाले बच्चों ने उसका मजाक बनाया।क्योंकि उसके पास उनके जैसी नई और महंगी साईकल जो न थी।उसके साथ के सारे बच्चे अपनी-अपनी साईकल से स्कूल जाते।वो अकेला ही था अपनी क्लास में जो पैदल ही स्कूल जाता।आज उसे अपनी माँ पर बड़ा ही गुस्सा आ रहा था।वो अपने क्लास
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