पढ़ाई या लालच- सर्फराजहमद

पढ़ाई या लालच- सर्फराजहमद

घर में चारों तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ हैं। खूब मिठाईयाँ बांटी जा रही हैं। कभी मामा तो कभी खाला जान के पास फोन कर बताया जा रहा है की शबाना बाजी पास कर गई वो भी फर्स्ट डिवीजन से इसी बीच शबाना,समय निकाल कर अपने ट्यूशन टीचर को फोन कर अपना परिणाम खुशी-खुशी बताती है और अपने घर आने का आग्रह करतीं है।टीचर शाम तक आने का वादा करते हैं।
संध्या सूरज ढलने के बाद टीचर का आगमन होता है। शबाना एक कुर्सी लाकर टीचर को देती हैं फिर एक प्लेट में कुछ मिठाईयाँ।

टीचर-आपका रिजल्ट बढ़िया आया हैं पर आप इस से बेहतर कर सकते थे।पर कोई बात नहीं,कहते हुए अंग्रेजी में एक कहावत कहते हैं। जिसका हिन्दी अर्थ “जो हुआ सो हुआ अब आगे देखो”
अब शबाना की अम्मी का आगमन होता हैं।
मुस्कुराती हुई टीचर को धन्यवाद करती हैं।
टीचर- अब तो खुश हैं न!
अम्मी-खुश काहे नहीं रहेंगे बेटी जो फस्ट डिवीजन से पास की है।

टीचर-अब आगे क्या करना है?शबाना का।
अम्मी-बेटी लड़की हैं ज्यादा पढ़-लिख कर क्या करेगी? दशवा पास कर ली ये कोई कम थोड़ी है। शबाना की कानों तक जब ये शब्द पहुँचे तो,वो मायूस हो जाती है। फूल सा खिला हुआ चेहरा अचानक मुर्झा सा जाता है आँखों में जो उम्मीद जगी थी वो आंसूओ में,बदल जाते हैं।
तुरंत बाद अम्मी पुछती है पैसा कब तक मिल जाएगा सर।लगभग दो तीन महीने लग जाएँगे पर आप तो कह रही है आगे नही पढ़ाएंगे तो बिना दाखला कराएँ छात्रवृत्ति का पैसा नहीं मिलता। अब जो हाल शबाना का हुआ था। कुछ वैसा हीहाल इस बार अम्मी का हुआ।थोड़ी देर बाद टीचर चले जाते है।

अब सभी खामोश बैठे हैं। अम्मी इसके पढ़ाई में पैसा खर्च करते-करते मैं बर्बाद हो गई,अब ये दस हजार मिलने वाला है तो नाम लिखवाना पड़ेगा।लगभग एक घंटा तक रेडियो की तरह बजते रही है। इधर शबाना अपनी बिस्तर पर पड़े-पड़े अपनी आंसूओ से अपनी ख्वाहिशे धोने लगती हैं।
समय बितता है और सभी के मन में उत्पन्न हल-चल सांत हो जाता है। कुछ शिक्षित व्यक्ति के समझाने के वजह से और दस हजार को ध्यान में रखकर शबाना का दाखला एल. एन.काॅलेज भगवानपुर में कराया जाता है।

छः – सात महीने तो यू ही बीत जाते है। दस हजार शबाना के खाता में आ भी जाता है। अम्मी बहुत खुश होती हैं।
फिर एक दिन शबाना के घर एक मेहमान आते हैं और बात ही बात में शबाना से पढ़ाई के बारे में पुछने लगते है।

मेहमान-पढ़ाई में क्या चल रहा है?
शबाना-I.scकर रही हूँ।
मेहमान- Tuition कहाँ करती हो?
शबाना-कहीं नहीं। घर पर ही तैयारी चल रही है।
मेहमान-अब बिहार बोर्ड,बिहार बोर्ड ना रहा बिना पढ़े पास करना मुश्किल है।ये सब कहकर मेहमान तो चले जाते है पर शबाना और अम्मी की परेशानियों में इजाफा कर जाते है।अम्मी फिर वही पुराने अंदाज में शबाना का खबर लेती है।
फिर एक दिन गाँव के ही एक शिक्षक शबाना के घर आते हैं तो अम्मी ये समस्या उनके सामने रखती है तो शिक्षक शबाना की तैयारी कराने को तैयार हो जाते है।और इस तरह समस्या का हल निकल जाता है और पढ़ाई शूरू हो जाता है। शबाना 2017 में बोर्ड परीक्षा देती है और फेल कर जाती है।

इस घटना के बाद शबाना का उम्मीद टूट जाता है और वो पढ़ाई छोड़ने का फैसला करती है।पर शिक्षक के समझाने-बुझाने के बाद फिर 2018 के बोर्ड परीक्षा की तैयारी में लग जाती है।काफी मेहनत और लगन के बाद 2018 के बोर्ड परीक्षा का परिणाम बहुत खराब होने के बावजूद भी शबाना
सेकण्ड डिवीजन से पास कर जाती हैं।

फिर घर में खुशियों की लहरा दौर परती है।फिर शबाना,शिक्षक को घर बुलाती है।घर के सभी सदस्य एक साथ बैठे हैं।शिक्षक का आगमन हुआ।
फिर अम्मी -पैसा कब मिलेगा।
शिक्षक- दाखला कराने के बाद।

   सरफराज अहमद

 

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