भ्रष्टाचार – ओमेंद्र सिंह

भ्रष्टाचार – ओमेंद्र सिंह

बुरा मान जाएँगे
सुन लेना, देख लेना, कर लेना बर्दाश्त
बोलना नही कुछ भी वो बुरा मान जाएँगे।
वो बड़े हैं, तुम छोटे हो यही बात बहुत है
और कुछ पूछना नही वो बुरा मान जाएँगे।
सरकार निकम्मी है फिर से वोट न देना
चुप रहो नेता जी हैं वो बुरा मान जाएँगे।
बड़ा शोख है वो लड़का उसे जाने को कहो
बाबू साहब का है बेटा वो बुरा मान जाएँगे।
अरे देखो उनको कर रहे मन्दिरों का अपमान
रोको मत, धर्म के हैं ठेकेदार बुरा मान जाएँगे।
कहीं से भी सही नही है उनकी नसीहत
चुपचाप मान लो नही तो बुरा मान जाएँगे।
कितना ढीठ है, जिद्दी है मां ये मेहमान
मत बोलो, घर के हैं दामाद बुरा मान जाएँगे।
सूरत है लंगूर की औ ख्वाहिशें हूर की
कहो नही कुछ रसुख वाले हैं, बुरा मान जाएँगे।

ओमेंद्र सिंह
कासगंज (उत्तर प्रदेश)

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