Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

दर्जी की सीख-मुकेश-परमार

एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण एक दर्जी का बेटा अपने पापा की दुकान पर चला गया। वहां जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा उसने देखा कि उसके पापा के जी से कपड़े को काटते हैं और किसी को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं फिर सुई से उसको जीते हैं और सीने के बाद सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं जब उसने इसी क्रिया को चार-पांच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया उसने अपने पापा से कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है पापा ने कहा बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो बेटा बोला पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा था आप जब भी कपड़ा काटते हैं उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं और सुई से कपड़ा सीने के बाद उसे टोपी पर लगा लेते हैं ऐसा क्यों इसका जो उत्तर पापा ने दिया उन दो पंक्तियों में मानो उसने जिंदगी का सारा सार समझा दिया। उत्तर था बेटा केजी काटने का काम करती है और काटने वाले की जगह हमेशा नीचे होती है परंतु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है यही कारण है कि मैं सुई को टोपी में लगा लेता हूं और कैंची को पैर के नीचे दबा लेता हूं।

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp