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दास्तां – ओमकांति

अभी तो हमें कुछ पता नहीं था की प्यार होता क्या है पर कोई एक पल के लिए आया और हमें अपना बनाने का फैसला कर गया| जब हमें पता चला तो उसकी जिंदगी बर्बाद हो चुकी थी जाने कितना दर्द शहा होगा उसने| उसकी डायरी जब किसी ने पढ़के सुनाया तो मै रो तो न सकी पर कभी जी न पायी आज हम दूर है पर हम बताना चाहते है उनसे की हम भी आपकी तरह प्यार करते है पर इजहार न कर सके| पर उसने भी किसी की खुसी के लिए प्यार कुर्बान कर दिया और हमने भी  | पर वक़्त भी अजीब है जिसके लिए हम दोनों दूर हुए अब वो दोनों इस दुनिया में न रहे अब आगे क्या बताये कुछ वक़्त ने खेला हमसे कुछ अपनों ने कुछ खुदा ने और जो बचा था हम दोनों ने खुद से ही खेल डाला|

Om kantiओमकांति

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Ravi Kumar

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

1 thought on “दास्तां – ओमकांति”

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