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#एकअंतहीनसफर-आशु लाइफ रेसर

कभी कभी सोचता हूं की कैसा होगा वो सफर जहाँ नहीं पता होगा किसी मंजिल का, जहाँ हम कही पहुंचने की जद्दोजहद मे नहीं होंगे, जहाँ जिन्दगी कही ठहरेगी नहीं वो अनवरत चलेगी किसी नदी की तरह

क्या होगा जब मैं किसी पहाड़ी पर बैठ के सोचूंगा तुम्हारे बारे मे, क्या होगा जब मैं खो जाऊंगा तुम्हारे खयालो मे, क्या होगा जब मैं गुजारूंगा रात खुले आसमान के निचे और सामने जल रहा होगा अलाव, जिसकी गर्मी तन नहीं मन तक को गर्म कर देगी, आने जाने वाली साँसे भी ख्याल करेंगी तुम्हारा,

सोचता हूं क्या होगा उस एक पल मे जहाँ हम सब कुछ छोड़ देंगे, जहाँ हमें पता होगा की अब ये आखिरी सफर है, एक ऐसा सफर जहाँ तुमसे मिलने के लिए इन्तजार नहीं होगा और ना ही घर वाले या किसी रिश्तेदार के देख लेने का डर, जहाँ मैं जब चाहू तुम्हारी यादो मे खो सकूँ, मालूम है वहा तुम्हे नहीं होंगी जल्दी घर जाने की

ऐसा सफर जहाँ सब कुछ मेरे मुताबिक होगा, जहाँ हम स्वछंद होंगे लोभ, मोह भय से दूर बस एक निश्छल प्रेम मे, जहाँ देने और लेने के नाम पे हम दोनों के पास सिर्फ प्रेम होगाजहाँ किसी नदी के किनारे पानी मे पैर डाल के हम गुजर देंगे पहर एक दूसरे को देखते हुए, या किसी पहाड़ी की छोटी सी दुकान पे बैठ के पिएंगे चाय को, उसके कुल्हड़ को होठो से लगाए हुए देखेंगे पहाड़ो की खूबसूरती को, वहा मेरे हाथ मे एक जलती हुई सिगरेट भी होंगी, पर उस असीम सौंदर्य के सामने मैं भूल जाऊंगा उसे पीना, धीरे धीरे राख़ होती हुई सिगरेट अचानक से उंगलियों को जला के एहसास कराएगी अपने होने का, और तुम्हारी आँखे बिना कुछ आहट किये घूम जाएंगी मेरी और जिसमे एक भय होगा, चिंता होंगी और हा तुम्हारा असीम प्रेम भी, जिसकी गर्माहट पिघल कर तुम्हारे होठो से बाहर आएगी और तुम मेरी उंगलियों को जल्दी जल्दी फूकोगी, मालूम है मुझे उस जलन से ज्यादा तुम्हारी फुक आराम देगी,

काफ़ी देर बाद तुम अपना चेहरा उठा के चिंता और प्रेम के मिले जुले स्वर मे कहोगी की” कितनी बार कहा है सिगरेट नही पीते लेकिन तुम सुनते ही नहीं ” और बिना कुछ कहे तुम्हारी आँखों से दो बून्द आँसू के गिरेंगे
मैं उसी बेबाकी से तुम्हारे आंसुओ को थामते हुए कहूंगा “की अगर मैं सिगरेट नहीं पियूँगा तो जो ये प्रेम रूपी सागर है वो कहा देखने को मिलेगा”, तुम अपने आपको मेरे अंदर समेट के कहोगी “बस बंद करो अपनी ये किताबी बाते” तुम्हे उसी रूप मे अपने अंदर संजोये हुए हम दोनों खो जायेंगे एक दूसरे मेउस समय तुम्हारे चेहरे पे हर समय बदलती हुई रेखाएं होंगी जिनको मैं पढ़ने की कोशिश कर रहा हूंगा, जिसमे मुझे मिलेगा केवल और केवल प्रेम, तुम्हारी हर कोशिश मे छिपी होंगी ख्वाहिश मुझे पा लेने की और मेरी हर इच्छा सुरु होंगी इससे की मैं तुम्हे समेट लू खुद मे

हम दोनों एक दूसरे के एहसास मे इस कदर खो जायेंगे की हमें जरुरत नहीं होंगी किसी के होने के या ना होने की, जहाँ दिन निकलेगा तुम्हारी एक मुस्कान के साथ और ख़तम होगा हम दोनों की ख़ामोशी के साथ

जहाँ जिंदगी हमारे मुताबिक होंगी सिर्फ और सिर्फ हमारे मुताबिक ❣️

आशुतोष पाण्डेय

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