एक भूल-प्रियंका शुक्ला

एक भूल-प्रियंका शुक्ला

राधा बहुत ही चंचल और मुहफट लड़की है, बिना कुछ सोचे समझे कभी भी कुछ बोल देती थी पर वो दिल की बुरी नहीं थी बाद में एहसास होने पर उसे पश्चाताप होता था, पर कहते हैं न
अब पछताये होत का जब चिड़या चुग गयी खेत
राधा शादी करके अपने ससुराल पहुँची सब लोगों ने बड़े ही चाव से अपनी नई बहु का स्वागत किया ।
घर में सभी रिश्तेदार मैजूद थे बस राधा के पति अमृत की बड़ी बहन आभा किसी वजह से नहीं आ पायी क्योंकि वह उस समय दिल्ली गयी हुयी थी । सब लोग राधा को बहुत प्यार करते और उसका बहुत ही ध्यान देते थे । राधा की शादी के कुछ दिनों बाद राधा अपने पदफेरों के लिए मायके जाती है । उसी समय आभा दिल्ली से वापस आ जाती है । और वो राधा से मिलना चाहती है इसलिए अमृत राधा को जल्दी ही वापस बुला लेता है। राधा आभा के साथ बहुत ही प्यार से रहती है और आभा भी राधा को बहुत पसन्द करती है । राधा ने अपने चंचल स्वभाव के कारण जल्दी ही सबके मन में अपनी जगह बना ली । आभा को आये एक हफ्ता हो गया था । एक सुबह राधा सोकर उठी तो देखा कि सब लोग बहुत ही ज़ोरों से किसी के स्वागत की तैयारी कर रहे थे, राधा ने अमृत से पूछा आज कोई खास दिन है क्या….
अमृत ने राधा को बताया कि आज आभा दीदी की बेटी नैन्सी आ रही है ।
सबके साथ मिलकर राधा भी तैयारियों में लग गयी नैन्सी आभा की पन्द्रह साल की बेटी है । नैन्सी के आते ही घर में हर तरफ खुशी सी दौड़ पड़ी थी । एक दिन नैन्सी पूरे घर में उछल कूद कर रही थी । नैन्सी बिल्कुल छः साल की बच्ची की तरह उछल कूद कर रही थी । राधा ने अमृत से बड़े ही रूखे ढ़ंग से कहा कि क्या नैन्सी को कोई दिमागी बिमारी है, क्या इसे किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाती दीदी अमृत गुस्से में ज़ोर से राधा पर बरस पड़ा, तभी आभा आ गयी और पूछ ही रही थी कि क्या हुआ उसी समय नैन्सी ने खेलते हुये राधा की शादी का फ्रेम तोड़ दिया । राधा गुस्से में बिना कुछ सोचे चिल्ला पड़ी कि अगर इसे कोइ दिमागी बिमारी है तो किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाती । ये पूरे घर में कूदती रहती है । आभा ने अमृत के साथ नैन्सी को कमरे में भेज दिया ।
और राधा की ओर मुस्कुराते हुए बोली – हम डॉक्टर के पास से ही तो आये हैं । मेरी नैन्सी जन्म से विकलांग थी उसी के इलाज के लिए ही हम दिल्ली में थे । उसे तो पता ही नहीं था कि अपने पैरों पर चलते कैसे हैं । इसलिए शायद वो ऐसी हरकतें कर रही थी । इतना कहकर आभा कमरे में चली गयी । ये जानने के बाद राधा को अपनी गलती पर पछतावा हुआ ।
कभी कभी हम कुछ ऐसा कर जाते हैं कि हमें पता ही नहीं होता कि हमने जाने अनजाने किसी को तकलीफ पहुँचायी है । हमें हमेशा सोच समझकर बोलना चाहिए क्योंकि कभी कभी हमारे कहने का मतलब वो नहीं होता जो लोग समझ लेते हैं ।

 

Priyanka Shuklaप्रियंका शुक्ला

       राजरूपपुर, अल्लाहाबाद

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