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एक लड़की की कहानी उसी की जुबानी-अनु-राजपूत

आज दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी हैं, लेकिन आज भी दुनिया में कुछ लोग कुछ परिवार ऐसा है , जो लड़कियों पर अपना जुर्म धारते है, लड़कियों को अपनी पैर की जूती समझते है ।लड़कियों को बचपन से ही मारा और पीटा जाता हैं, छोटी छोटी बातों पर उन्हें गालियां और ताना दिया जाता हैं , उन्हें उच्च शिक्षा से बांछित किया जाता हैं, उन्हें बस घर के चूल्हा और चौकी तक ही सीमित रखा जाता है , और अगर कुछ जबाब दे दे तो उसे घर से निकाल देने की भी धमकी दी जाती हैं। और खाने के नाम पर मर्दो का झूठन या बचा खुचा खाना ही मिलता हैं । आखिर ऐसा क्यों ? मैं पूछती ही लड़की के साथ ही ऐसा क्यों होता हैं , ऐसा इसलिए कि उसका कोई घर नही है , ऐसा इसलिए कि वह समाज मे लड़की पैदा हुई है आखिर उसका क्या गुनाह है ? मुझे शर्म आती है उस पिता पर जो कमाकर अपनी बेटियों का पेट नही भर सकता , अरे जब तेरी औकात नही थी बेटी पालने की तो तूने 5, 6 बेटियां पैदा ही क्यों कि ? आज भी समाज मे ऐसे लाखो लड़कियां है जो इस तरह के समस्या से जूझ रही है और उनका ही परिवार उन पर जुर्म कर रहा है । आखिर ये बेटियां कब तक सहती रहेंगी दुनिया और परिवार के जुर्म को ।

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