I am not a teacher-sujeet-kumar

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बुढ़ा खड़ुस माकन मालिक ने मुझे घर से निकल दिया, निकलता भी क्यों नहीं छः महीने का किराया जो बाकि था। घर से पैसे तो आ नहीं रहे थे जो मै  उसको देता,  कब से बोल रहा था दे दो -दे दो पर नहीं, अंत में उसने मुझे निकल ही दिया।

उस  खड़ुस पर मुझे गुस्सा बहुत आ रह रहा था पर मेरे घरवाले  ही ऐसे है  तीन महीने से फ़ोन कर रहा हूँ पैसो के लिए, आज भेज दूंगा कल भेज दूंगा यही बोल रहे है पर कभी टाइम पर पैसा भेजा नहीं।अब फ़ोन करने का भी कोई फायदा  नहीं। अब मैंने तय कर लिया था की जो भी करना है खुद करना है। पर मुझे तो ये चिंता थी की आज रहूँगा काहा, मुझे गुसा तो आ रहा था पर  कर भी क्या सकता था। मै अपना सब सामान लेकर पार्क में बैठा था।  शाम होने को थी। सब घर जाने लगे थे। मै उदास था,मै किताब खोलकर पढ़ने लगा। तभी एक बची मेरे पीछे आकर खड़ी हो गयी, वो मेरे पीछे छिप रही थी। तभी सामने से उसकी माँ आती हुई दिखी, शयद वो उसे घर ले जाना चाहती थी पर वो बच्ची घर नहीं जाना चाहती थी।
वो आते ही बोली – आपको परेशान तो नहीं कर रही है न।
मै बोला नहीं बस थोड़ा सा शरारत कर रही है।
वो बोली हाँ  शरारती तो है…..  मैंने उनके बातो को काटते हुए बोला थोड़ी प्यारी भी है।
वो हंस पड़ी। …  और मै भी हंस पड़ा।
वो बच्ची को गोद में उठाते  हुए बोली हमें घर चलना होगा। पर बच्ची ज़िद पकड़े हुए थी की हमें घर नहीं जाना उसे थोड़ी देर और खेलना है।
माँ ने उसे समझाया की अब बहुत देर हो गयी है ,रात होने को है इसलिए अब उसे घर चलना चाहिए।
बच्ची ने मेरे तरफ इशरा करते हुए बोली पर ये भैया तो अभी तक घर नहीं गए।
उन्होंने मेरे तरफ देखा उनकी नजर मेरे सारी समान पर पड़ी  वो  चौक गयी। वो  मेरे तरफ शक के निगाहो से देखते हुए बोली क्या तुम घर से भाग के आये हो ?
मै उनकी बाते सुनकर जोर से हंसा। वो भी मुस्कुराते हुए बोली क्या मैंने कुछ गलत बोली।
मै उनके ओर देखा और बोला नहीं। वो बोली तो फिर बता दो। फिर मैंने उनको अपनी सारी बात बता दी।
वो हमारी बाते सुनके इमोशनल हो गयी और बोली अब तुम कंहा रहोगे। मैंने बोला पता नहीं।
वो बोली अगर तुम चाहो तो मेरे यंहा रह सकते हो। मै बोला मेरे पास पैसा नहीं है।  वो कोई बात नहीं जब होगा  दे देना। मै उनके बातो पे बस मुस्कुरा दिया।  वो बोली तब चले।  मै  भी सब सामान उठा के उनके पीछे चल दिया।
आज मुझे भगवन में विशवास हो गया था। क्या सही टाइम पे इनको भेजे थे।   और मुझें  विशवास हो गया था की आज भी अच्छे लोग मौजूद है इस दुनिया में।
उन्होंने चलते -चलते पूछ लिया की तुम्हारा नाम क्या है ?
मैंने जवाब दिया – जी मयंक।
वो छोटी बच्ची बोली भईया मेरा नाम सायरा है।
मैंने बोला बहुत ही प्यारा नाम है।  वो तारीफ सुनके वो मुस्कुरा दी। तभी उसकी माँ ने बोली और मेरा नाम लक्ष्मी है। .और हम तीनो हंस पड़े।
हम घर पहुंच गए थे।  घर बहुत बड़ा था। मुझे रूम दिखाकर सायरा की माँ किचन में चली गयी।  सायरा हमारे साथ रूम में ही थी। वो हमे किसी मेहमान की तरह ट्रीट कर रही थी। वो मुझे कुछ भी चाहिए फाटक से ले आती।  वो मेरे हर जरूरतों का ख्याल रख रही थी, एक अच्छे बच्चे की तरह। वो मुझसे देर रात तक खूब बाते की।  वो अपने टीचर दे बारे में बताती , स्कुल के दोस्तों क बारे में। और उनके बारे कोई फनी बात बताकर जोर-जोर से हसती , उसकी आवाज किचन तक जा रही थी। उसकी माँ उसे शांत रहने को बोल रही थी।   वो मुझसे घुल मिल गयी थी।
जब हम डिनर के लिए बैठे तो हमे उनके बारे में कुछ जानने को मिला। सायरा के माँ ने बताया की सायरा  के पिता एक टीचर थे। पर उनका कार असिडेंट हो गया और चल बसे और उनके जगह उसके मा जॉब मिल गया अब उसकी माँ भी एक टीचर है। ये घर उसके पिता ने बनवाया था इसीलिए वो अब वंही रहते है।  इतने बड़े घर में बस वो दो ही।
ये दुःख की लेकिन कमाल की बात थी की एक औरत को इतने बड़े घर में अकेले रहना, अपने बच्चे को खुद ही पालना , सच में कमाल थी ये काम औरत ही कर सकती थी।
अब मै वंहा सब से घुल मिल गया था। घर  सदस्य की तरह ही रहने लगा था।  अब मै सायरा को खुद ही पार्क ले जाता था घूमने के लिए। वो तो मुझसे कभी नाराज भी हो जाती थी और मेरे सरप्राइज से जल्दी खुश भी हो जाती थी। सायरा मुझे बहुत पसंद थी। मै  भी उसके साथ बच्चा बन जाता था। सायरा मुझे अपनी छोटी बहन की याद दिलाती थी। मुझे तो हमेसा से बच्चे पसंद थे। मै  सायरा को स्कूल भी  छोड़ने लगा था, क्योंकी उसकी माँ उसी समय अपने स्कुल जाती थी। जब वो स्कुल से आती तो अपने टीचर के बारे में बताती। होमवर्क के बारे में पूछती मै उसे सोल्भ करने में मदद करता। वो हमसे बोलती की एक दिन वो माँ की तरह टीचर बनेगी। मै  उसका उत्साह बढ़ता की एक दिन वो जरूर टीचर बनेगी और वो मुझसे पूछती की टीचर बनाने के लिए क्या करना पड़ेगा तो मै उसे वही पुराणी पोएम सुना देता –
गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागु पाए
बलिहारी गुरु आपने जिन गोविन्द दियो बताये
मै  इसका अर्थ बताता की टीचर को भगवन से भी उच्चा मन गया है।  इसलिये टीचर को एक मर्यादा में रहना होता है,जो उसे भगवन से उच्चा बनावे,उन्हें शांत और गुणवान होना चाहिए।

मै रोज की तरह आज भी सायरा को स्कूल से लेने गया पर आज स्कुल में  भीड़ लगी थी। लोग , पत्रकार , पुलिस,  न्यूज़ चॅनेल वाले स्कूल के बहार प्रदर्सन कर रहे थे। मुझे कुछ समझ नहीं आया ये सब स्कूल क बहार ऐसा क्यों कर रहे है।  मुझे भीड़ से ही पता चला की कोई टीचर ने एक आठ कलास के छात्र को स्कूल के छत से धका देकर मार दिया है, मै  ये सुनते ही शॉक्ड हुआ। मै फाटाक से स्कूल परिसर में गया पर मुझे गार्ड ने रोक लिए मैंने उसे सायरा के बारे में पूछा ? सायरा सामने से दौड़ती हुई आ रही थी वो डरी  हुई थी। मैंने उसे गोद में उठा लिया कंधे पर सर रख के वो सिसकने लगी।  मैंने बोला सब ठीक हो जायेगा। मै उसे लेकर घर आ गया। मै न्यूज़ चैनल खोलकर देखने लगा तब मुझे वंहा से सब बात पता चला की कोई टीचर के छेड़छाड़ से तंग आकर एक लड़की ने स्कूल के छत से कूदकर अपनी जान दे दी। तब तक सायरा की माँ भी आ गयी थी उन्हें  इस घटना के बारे पता चल चूका था।  वो आते ही सायरा के  गले लगी और बोली तुम ठीक तो हो।  उनकी नजर भी tv पर पड़ी लोग से अभी इस घटना के बारे में पूछा जा रहा था। लोग बोल रहे थे की लड़की को पहले स्कुल आने में मनचलो से डर  लगता था अब तो टीचर ही उनहे छेड़ने लगे है। इससे अच्छा है की लड़कियां अपने सुरक्षा  के लिए घर में ही रहे।
तभी सायरा ने अपनी माँ से बोली माँ मै अब टीचर नहीं बानूगी, टीचर बहुत गंदे होते है। माँ ने उसकी बात सुनकर मेरी ओर देखी ,मैने उनहे  देखते हुए T.V बंद कर दिया।

सुजीत कुमार 

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