कामयाबी-सूरज कुमार

कामयाबी-सूरज कुमार

यह कहानी है एक भाई बहन की जो की एक गॉव में रहते है। एक छोटा भाई और एक उसकी एक बड़ी बहन रहती थी।भाई बेचारा लचार था क्योंकि उसका पैर में लकवा मारा हुआ था।उन लोग के माता -पिता इस दुनिया में नही थे तो सारा जिमेदारी उसकी बड़ी बहन पर थी।लड़का पढ़ाई में अच्छा था लेकिन उसे स्कूल जाने में समस्या होती थी ।लेकिन उसकी बहन उसे स्कूल पहुचाति फिर कोई दूसरा काम करती थी।लड़की को बहुत काम करना पड़ता था ।फिर भी वह अपने भाई से बहुत प्यार करती थी और लड़का भी अपनी बहन से बहुत प्यार करता था।लेकिन भाई को बहीत बुरा लगता था अपनी बहन को इस हालात में देख कर लेकिन बेचारा कर भी क्या सकता था वह तो खुद लाचार था। वह अंदर -अंदर अपने आप को कोशता रहता था की भगवान उसे ऐसा क्यों बनाये।उसकी बहन उसका इलाज़ भी करती थी ।एक दिन डॉक्टर बोलता है की उसका भाई का पैर ठीक हो जायगा लेकिन उनका पैर का ऑपरेशन करना पड़ेगा और ऑपरेशन के लिए बहुत सारा पैसा लगेगा ।बहन भाई के ऑपरेशन के लिए बहुत मेहनत करती है और पैसा इकठा करती है।फिर वह अपने भाई का ऑपरेशन करती है।उसका भाई एक दम ठीक हो जाता है और अपने पैरो पर खड़ा हो जाता है।भाई को पढने का बहुत सौक रहता है तो वह शहर जा कर पढना चाहता है लेकिन उन लोगों के पास इतना पैसा नही रहता है की वह शहर जा कर पढ़ाई कर सके।फिर भी उसकी बड़ी बहन उसे पढने के लिए शहर भेजती है ।लड़का अपनी बहन से दूर हो जाता है और पढ़ाई करने शहर चल जाता है ।वह अच्छा से पढ़ाई करता है और एक बड़ी कंपनी में नौकरी करने लगता है ।इधर उसकी बहन अकेले रहती थी ।लड़का बहुत पैसा कमाता है लेकिन वह भूल गया होता है की उसकी कोई बहन भी थी ।वह जाह भी पहुचा है तो बस अपनी बहन की वजह से ।लड़की अपने भाई के इंतेजार में रहती है की वह एक दिन आएगा और उसे अपने साथ ले जायगा लेकिन लड़का भूल स ही गया था की उसकी कोई बहन भी है ।उसकी बहन शहर जाने का सोचती है ।वह वहाँ जाती है पर वह अपने भाई से मिल नही पति है ।बेचारी भूखी हारी थाकी ऐसे ही सड़क पर चल रही थी की अचानक से एक गाड़ी वाला से टकड़ा जाती है फिर लोग इकठा होते है ओर उसे पास के हॉस्पिटल में ले जाते है ।चोट ज्यादा नही लगा था सब पूछते है की आप इतना उदास क्यों है तो वह बताती है की वह अपने भाई से मिलने आई है और वह उस से नही मील पाई है ।फिर वह आदमी उसका भाई का नाम पूछता है ओर बोलता है की में तो उसको जानता हूँ वह बोलता है की आप यही रुकिएगा मैं उसको बोल दुगा।जब भाई को पता चला तो वह फिर दौड़ा चला आता है जब वह अपने बड़ी बहन को इस हाल में देखता है तब वह बहुत रोता है ।और उसको अपने बचपन के दिन याद आने लगते है ।फिर दोनो भाई बहन मिल जाते है।
दोस्तो यह स्टोरी से मैं यह बताना चाहता हूँ की हम अपनी कामयाबी के पिछे इतना भागते है की अपने परिवार को आपके कामयाबी के पीछे कोन था उसे ही भूल जाते है।ऐसा कामयाबी किस काम की जहाँ हम अकेले पड़ जाय।

 

 

 सूरज कुमार

दानापुर, पटना

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