काश तुम बदले ना होते-कार्तिका सिंह

काश तुम बदले ना होते-कार्तिका सिंह

दिल्ली के प्रेम गली परेशान मोहल्ला रानी चौक में एक छोटे से घर में बड़ी हलचल मची हुई थी। आखिर हो भी तो क्यों ना हर लड़की का अरमान होता है एक दुल्हन बनने का। और पूजा को लड़के देखने वाले आने वाले थे। घर की सभी तैयारियों के बीच अचानक से घर की बैल बजती है। और जानवी दौड़ी हुई गेट के पास जाती है ।अपने होठों पर मुस्कुराहट लिए और जल्दी से गेट खोलती है। मानो की जैसे उसे मालूम होता है कि उसके होने वाले जीजू आ चुक हैे।

लड़के के घरवाले लड़की को देखने के बाद । लड़की की छोटी बहन जानवी का भी रिश्ता उनके छोटे बेटे ‘जीत’ के साथ तय करने की बात रखते हैं । लेकिन जानवी और पूजा के पिता के गुजरने के बाद घर की स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि उनकी माँ दोनो बेटियों का एक ही मंडप में विवाह करें।इसलिए उन्होंने अपनी बड़ी बेटी का विवाह कराया और छोटी बेटी के लिए कुछ वक्त की मोहलत मांगी। और शादी बाद में करने की बात कही।

और बड़ी बेटी पूजा की शादी के बाद दोनों घरो में आना जाना चलता था , उसी बीच जानवी की मुलाकात उसके होने वाले पति से होने लगी थी ,,
एक अधूरी कहानी को अंजाम मिल चुका था
एक तन्हाई को सुकून मिल चुका था। कुछ ऐसा ही जानवी को महसूस हो रहा था
वह मोहब्बत के उस सफ़र में थी। जहा केवल दो दिल धड़कते हैं। और एक दूसरे के साथ रहने की तमन्ना करते हैं फिर क्या था जीत का बाइक पर आना उसे जानवी को लंबी ड्राइव पर ले जाना घरवालों का भी वह खूब अच्छे से ख्याल रखता था जानवी की हर जरूरतों को समझता था । यूं ही दिन गुजरते गए और जानवी की मां को इंतजार था तो सिर्फ जानवी की शादी का वो एक एक पैसे का इंतजाम कर रही थी । ताकि वह जीत के साथ हंसी खुशी रह सके ।जनवी जोब भी करती थी। कई कई बार तो जानवी ऑफिस में होती थी ।और वह बेचैन अपने घर पर बैठा फिर क्या था ।आखिर मोहब्बत का इंतजार कभी रुका है क्या ? दो प्यार करने वालों को कोई जुदा कर सकता है क्या ? जानवी अक्सर जल्दी छुट्टी लेकर उससे मिलने जाया करती थी यूंही। मुलाकात होती रही और यह मोहब्बत और गहरी ।

शनिवार की रात की बात है बहुत जोर से बारिश हो रही थी जानवी घर पर आराम से लेटी हुई Tv देख रही थी अचानक बेल बजती है ! और जानवी मन में कहती हैं,इतनी रात को आखिर कौन हो सकता है। रात के १० “११ बज रहे थे जानवी ने मां से कहा। मां उठो देखो कोई गेट पर आया है मां ने दरवाजा खोला और जीत को इतनी रात को बारिश में देखकर चौकन्ना रह गई। और पूछा इतनी रात को क्या हुआ ??कुछ बात हो गई?? तो जीत ने कहा नहीं मम्मी जी वह आज मैं इधर से गुजर रहा था ।और इतनी तेज बारिश होने लगी । तो सड़क पर ट्रैफिक ज्यादा है तो मुझे लगा कि क्यों ना मैं यहीं रुक जाउ,, और सुबह फिर चला जाऊंगा ।जरा सी गंभीरता के साथ _उसने बोला अगर मम्मी जी आपको कोई दिक्कत है ,, तो क्या में रुक जाऊं। बारिश का मौसम देखकर जानवी की मां को जीत का उनके घर पर रुकना सही लगा। और तभी जानवी ने जीत को देखा””” जीत को पूरी तरीके से भीगा हुआ देखकर जानवी फट से तौलिया लेकर उसकी तरफ भागी और उसका सिर पोछऩे लगी। इतने में ही जानवी की मां ने अपने पति की कुछ पुराने कपड़े जीत को पहनने के लिए दिए।फिर उसके बाद ….उनकी देर रात तक लंबी बातें चली ——- जानवी की मां ने जीत को दूसरे कमरे में सोने के लिए कहा और वह जानवी के साथ सो गई वह कहते हैं ना बारिश पैगाम लेकर आती है और यह बारिश भी दो प्रेमियों को मिलाने के लिए आई थी । फिर क्या था बाहर बारिश का मौसम और यहां दो दिलों की धड़कन । एक से हो रही थी जानवी को नींद नहीं आ रही थी। जीत को भी नींद नहीं आ रही थी। दो दिल बेचैन थे मगर मिलन की घड़ी दूर नहीं थी जानवी ने धीरे से पलंग से उठकर ,अपने मंगेतर के कमरे में जा पहुंची फिर क्या बातों बातों में दो दिल चुपके चुपके मिल ऱहे थे। लंबी बातें और फिर मोहब्बत का बांध टूट गया। और उस रात दो धड़कन एक हो गई थी।

“मेरी मोहब्बत को पूरा इस रात ने किया
तुम्हारी और मेरी मुलाकात ने किया
जो था
कहीं अधूरा सुकून वह आज
हम तुम मिले पूरा हुआ

इसी बीच जानवी की बड़ी बहन पूजा के वैवाहिक रिश्तो में खटास ने जन्म ले लिया था ।पूजा के ससुराल वाले पूजा पर बहुत जुल्म करने लगे। जिसके चलते बात बहुत आगे बढ़ गई ।और जानवी की मां को लगा कि हमने गलत परिवार में शादी कर दी ।और जब जानवी की मां जीत से कहती कि अपने बड़े भाई को …..अपने परिवार को थोड़ा समझाया करो,, कि पूजा के साथ अच्छा बर्ताव करें तो —- जीत कहता था …..मुझे पता है मेरी भाभी है मुझे क्या करना है और मेरे परिवार को क्या करना चाहिए आपको बीच में बोलने की जरूरत नहीं है । हम सभी को अच्छी तरह पता है
उस दिन के व्यवहार के बाद जानवी की मां ने जीत को घर आने के लिए मना कर दिया ।
और जानवी को भी कहा की….. अब उससे मिलना नहीं है । और तेरी शादी उससे नहीं हो सकती क्योंकि उनका घर सही नहीं है ।उनका परिवार सही नहीं है । जानवी ने पहली बार अपनी मां को जवाब दिया और कहा ….लेकिन माँ मेरा जीत (मेरा मंगेतर तो सही है तै ) माँ ने गुस्से में कहां ____ काहे का मंगेतर,, तेरी सगाई तो नहीं हुई,,,, और इतने में ही जानवी ने पलटकर गुस्से में मां को जवाब दिया। मेरी और जीत की सगाई नही हुई तो क्या हुआ ? शादी की बात तो हुई है ।और आपको पता है न मम्मी ,, मैं और जीत हम एक दूसरे को कितना प्रेम करते हैं ,, मां ने कहा अच्छी जिंदगी के बारे में सोच जानवी जीत का परिवार सही नहीं है।
माँ जीत तो सही है ___वह मुझे खिलाएगा वह मुझे रखेगा अपने घर पर”” उसके घर वाले से मुझे लेना देना थोड़ी है मुझे “जीत” से से शादी करनी है उसके घरवालों से नहीं ,,,तभी जानवी की मां ने कहा वाह ! अभी जो उसने जवाब दिया

~~जो तेरी दीदी के साथ हो रहा है। देखा कल को तेरे साथ होगा तो क्या जीत तुझे बचाएगा? जब वह अपने घर वालों का इतना साथ दे रहा है तो तेरे लिए वह घर से खिलाफ जाएगा
जानवी बेटा यह दुनिया बहुत बेकार है तुम नहीं जानती इसलिए “जीत” को भूल जाओ मां ने बड़े सहज भाव से जानवी को समझाया।

एक-एक करके जानवी की मां के सामने उनकी शादी शुदा बड़ी बेटी के रिश्ते बिगड़ रहे थे ।उनकी बेटी के ससुराल के सारे काले करतूत बाहर आ रहे थे। और जीत के घरवाले जानवी को ””””उसकी बहन के ससुराल बुलाते थे ।जीत से मिलाने के लिए। ,,तो जानवी की माँ मना कर देती थी। क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उनकी दुसरी बेटी का उस घर से रिश्ता हो
और जीत के घर वाले उसकी बहन पूजा को बहुत मारते थे। और उसकी बहन को कहते थे कि अपनी-बहन जानवी को बुलाओ , और जिसके डर के कारण जानवी को वहां जाना पड़ता था~~~ लेकिन कहीं ना कहीं जानवी को जीत पर विश्वास था और उसके 3 साल तक मामला ऐसा ही चलता रहा।
और जानवी भी चुप चाप जीत पर विश्वास कर बैठ गई ।और एक दिन जीत ने जानवी से कहा ____सुनो मुझे लगता है।हमें शादी करनी चाहिए
जानवी ने कहा ठीक है ___मैं मां से बात करूंगी
तो जीत ने कहा ___नहीं पहले हम मंदिर में शादी करेंगे
फिर कोर्ट मैरिज करेंगे और फिर तुम्हारी मां को बताएगे ताकि वह हमारी शादी करने के लिए मजबुर हो जाए ।
जीत के घरवालों को यह बात पता थी लेकिन जानवी ने अपनी मां को या अपने घरवालों को कुछ नहीं बताया था

और वह सवेरा भी आ गया था ।
जब जानवी को जीत का होने के लिए निकलना था । एक मंदिर में आसमान को आशीर्वाद और अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने विवाह किया और जब जानवी ने कोर्ट मैरिज की बात की तो जीत ने झिझकते हुए कहा___वह मुझे कोर्ट से फोन आया था हमारे कोर्ट मैरिजकी डेट टल गई है।

जानवी सुनो
___ जब तक हमारी कोर्ट मैरिज नहीं होती तूम अपने घर में रहो और मैं अपने घर मे।
और उसके बाद जीत से जानवी की मुलाकातें बातें कम होने लगी।और जब वह बार-बार कोर्ट मैरिज की जीत से बात करती तो ।जीत टालने लगता और एक दिन जीत की आखरी फोन काल आई जानवी को पलट कर जवाब भी दीया। सुनो जानवी हमारे बीच कोई रिश्ता अब नहीं है और मेरी शादी मेरी प्रेमिका से होने जा रही है अब तुम मुझे तंग करना छोड़ दो ।और हां तुमने कुछ करने की कोशिश की ना तो तुम्हारी फोटोस मेरे पास है तुम मुझे जान तो चुकी होगी कि मैं क्या कर सकता हूं।तुम कुछ नहीं कर सकती तुम्हारी बहन भी हमारे घर पर है ।मेरे घर वालों ने तुम्हारी बड़ी बहन से शादी इसलिए की थी क्योंकि हमारे घर में कोई रिश्ता करना नहीं चाहता था ।और दहेज मिलने के बाद हमें तुम्हारी बहन से कोई रिश्ता नहीं है ।और लेकिन तब भी अगर तुम अपनी बहन की सलामती चाहती हो तो चुप बैठो
और जब तुम्हारे पास कुछ बचा ही नहीं है। किसी से जाके कुछ कहने को तो क्या कहोगी किसी से यह की तुम्हारा इस्तेमाल किया है ।लोग थूकेगे तुम पर ।यह प्यार मोहब्बत कुछ नहीं होता पर जरूरत होती है जो की तुम से पूरी हो गई। शादी करके क्या फायदा ! दहेज में कुछ लाओगे तो नहीं यह सब सुनकर जानवी मानो टूट सी गई । उसका विश्वास टूट चुका था। वह खुद की निगाहों में गिर चुकी थी और अगले दिन जानवी को उसके WhatsApp पर एक शादी का कार्ड आता है और जीत के सगाई की फोटोस जो जीत ने भेजी होती है।

फिर क्या था,,
कुछ टूटा था ”
__
एक दिल टूटा था
आवाज नहीं हुई थी।
उस दिन नफरत ने हल्के से दरवाजे पर दस्तक दी थी ।
एक लड़की का तभा हुई थीं

एक लड़की का विश्वास टूटा था
एक लड़की की इज्जतका तमाशा बना था —
लेकिन वह लड़की रोइ नहीं थी जानते हैं क्यों?
क्योंकि अब वह लड़की मर चुकी थी
जानवी जिंदा ही नहीं थी

और कुछ चंद लफ़्ज़ों में उसकी मौत ने कुछ यह बयां किया

काश तुम बदले ना होते तो ,,, मैं जिंदा होती ,,

मेरी जिंदगी एक परिंदा होती

आशियाना होते तुम

 

       कार्तिका सिंह

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account