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केले का छिलका-सुनील-कुमार-शर्मा

चलते हुए अचानक उसका पैर एक केले के छिलके पर पड़ा ; और वह फिसलकर औंधे मुँह गिरा। बड़ी मुश्किल से उठते हुए, उसने झेंपकर इधर – उधर देखा, कोई देख तो नहीं रहा। जब उसे तसल्ली हो गई कि आस-पास कोई नहीं है ; तो उसने उस केले के छिलके को पाँव से सरकाकर ओर आगे बिल्कुल रास्ते के ऊपर कर दिया, और चुपचाप लंगड़ाते हुए आगे बढ़ गया।
सुनील कुमार शर्मा

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