किसान भाई – पुष्कर कुमार

किसान भाई – पुष्कर कुमार

भारत हीं नही संम्पूर्ण विश्व के अमीर लोग,जो एेसो-आराम की जिंदगी जीते है,एयर-कंडिसन से कभी बाहर तक नही निकलते,मोटर कार या हवाई जहाज मे घुमते है । अपने आप को अमीर बताते है,जो कि वास्तव मे अमीर है नही ,यह तो दुनिया के लिए दिखावे मात्र है। हद तो इस बात की है कि कुछ पत्रिका इनकी अमीर होने का रैंक भी प्रदान करती है और मिडिया वाले भी इनकी गुन गाते नही थकते। लेकिन इन सब के घर पर खाना जो कि किसान भाई ऊपजाते है,अगर पहुँचाना बंद कर दी जाय या किसान भाई इतना ही ऊपजाये जितना अपने लिए जरूरी है। तो कल्पना कर सकते है, इन सभी अमीर का क्या हाल होगा । मनुष्य के लिये हवा और पानी के अतिरिक्त जरूरी चीज खाना ही है जो सिर्फ अन्न दाता किसान भाई ही दे सकता ।

आजादी से लेकर अब तक किसान भाई कि स्थति मे कोई खास परिवर्तन नही हो पाया, जितने भी सरकारी या निजी कर्मचारी है उनका तो वेतन समय-समय पर बढ रहा है।पर बेचारे अन्नदाता की नही,यहाँ तक की इनकी खेती मे होने वाले लागत भी काफी वृद्धि हुई है। (जैसे कि मक्का के बीज का मूल्य 400-500 रू किलोग्राम,धान के बीज का मूल्य 300-400 रू किलोग्राम है।लेकिन जब किसान भाई इसे ऊपजाकर बेचने जाते है, तो महज 10-12 रू किलोग्राम, यही समस्या लगभग सभी फसल की है। ) खाद,बीज और दवा का मूल्य तो आसमान छु रहा है। फसल का उचित मूल्य नही मिल पा रहा है। इसके अलावा कभी-कभी तो बाढ या सुखार की चपेट मे फसल बर्वाद हो जाता ,घर तक भी नही पहुँच पाते। इस परिस्थति मे उनकी हालत का अंदाजा आप भली-भाती लगा सकते है,इस स्थति मे उनकी लागत तक ऊपर नही हो पाता और कर्ज मे डुबता चला जाता है ।अन्त मे उनकी भरपाई हेतु जमीन तक बेचनी पड़ जाती है। आखिर इस परिस्थति मे वह क्या कर सकता,उनकी अच्छी स्थति कि कल्पना हम कैसे कर सकते है।

कदम उनकी जमीन पर ,मिट्टी का है घर
कद छोटा ,हाथ खाली,पर लोग बड़े है वह
उनकी मेहनत से भरता संसार की पेट
वरना भूखे सोते सारा मानव इस जग मे ।

Pushkar Kumarपुष्कर कुमार
दियारी,अररिया

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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