Magic Story

Magic Story

एक बार मैँ अकेला विदेश घुमने गया।
वहाँ पर मुझे टिब्बो से गुजरना पड़ा।
अचानक एक जोरदार तुफान आया।
तुफान सच मेँ बहुत भयँकर था।
इतना तेज की मुझसे चला ही नहिँ जा रहा था।
फिर एक तेज जोरदार हवा का झोँका मुझे उड़ा ले गया।
और एक खड़े मेँ गिर गया।
मैने अपने पाँव जमीन मेँ दबा लिए और खडे मेँ लेट गया।
तुफान बहुत भयँकर था और धुल से पुरा आसमान काला हो गया था।
लगभग 2-3 घंटो के बाद तुफान रुका और
मैँने देखा कि मैँ एक कब्र मेँ लेटा हुआ था।
वहाँ से उठा और हाथ-कपड़े झड़का कर आगे चला ॥2॥

आगे चलते-चलते मुझे परछाई मेँ कोई बड़ा सा जानवर दिखाई दिया।
नजर ऊपर की तो देखा कि एक चिल मुझ पर हमला करने वाली है।
मैँ जी तोड भागा…
परंतु चिल ने मुझे पँजोँ मेँ दबोच लिया।
और मुझे ऊपर ले गई।
फिर मैनेँ अपनी जेब से पैन निकाला और चिल के पँजो मेँ खोँप दिया।
तो चिल ने मुझे उपर से ही छोड दिया।
मैँ पसीने से तर-तर हो गया
न जाने अब बचुँगा के नहिँ? ॥3॥

इतनेँ मे मैँ पानी मे गिर गया। ऊफ जान तो बची।
मैने अपना सिर पानी से बाहर निकाल कर देखा कि
मैँ एक समुँद्र मे पडा था।
इतना पानी! बाप रे बाप!
सुखर है मुझे तैरना आता था। परंतु
लहरेँ इतनी तेज थी कि मैँ तैरता-तैरता थक गया।
Hey God! क्या होगा अब??? ॥4॥

इतने मेँ एक मछली ने मुझे निगल लिया।
हाय राम! अब तो गया काम से।
मेर GOOD LUCK था कि उने मुझे चबाया नहिँ।
उसके पेट मेँ गंदी बदबु आ रहि थी
और मेरा दम घुटने लगा।
इतने मेँ मुझे उसके पेट मेँ नुकुली चीज मीली।
शायद वो किसी अन्य जानवर कि हड्डी होगी।
मैने उसे उठाया और उसके पेट मेँ खोँपने लगा
तो मछली तेज-तेज दौडने लगी।
फिर काभी मेहनत के बाद मेने उसके पेट को फाड़ दिया और
उससे आजाद होकर तैरने लगा।
फिर एक जोरदार लहर आई जिसमेँ मैँ गुम हो गया।
साँसे तेज-तेज दौड़ने लगी
न जाने अब क्या होगा? ॥5॥

उस लहर ने तो कमाल ही कर दिया।
मुझे किनारे के पास ले गई।
और मैँ वहाँ से बच निकला।
फिर मैँ अपना रास्ता ढुँढने लगा कि
एक कुत्ता मेरे पिछे हो लिया।
लगता है कि कुत्ता हड़काया था।
मैँ डर के मारे भागने लगा।
मैँ कुत्ते के आगे, कुत्ता मेरे आगे।
ऐसे दौडते-दौडते हम जँगल मे पहुँच गए।
फिर मैँ एक पेड़ पर चढ़ गया।
कुत्ता भौँक्ता रह गया।
और फिर चला गया।
मुझे कुछ समय आराम महसुस हुआ।
परँतु यह क्षिक था।
जी हाँ! अचानक बदँरो के एक झुड ने मुझ पर आक्रमण कर दिया।

सभी बँदर मेरी और बढेँ।
मेरा दिल और दिमाग दोनौ हिल गए।
जेसे हि मैने पेड़ से छलाँग लगाई
सभी बँदर मेरी और दौडे आए।
एक पल के लिए तो मेरी जान निकल गई।
बदँर मेरे पिछे, मैँ बदँरो के पिछे। ॥6॥

अचानक मुझे एक केलो के पेडो का झुड दिखाई दिया।
मै उसमे छिप गया और बदँरो ने कुछ समय मुझे ढुढाँ
फिर केले खाने मेँ मगन हो गए।
लो बची जान।
तभी मेरा ध्यान एक अजीब आवाज पर गया
जो पत्तोँ की थी।
ध्यान से देखने पर मुझे एक काला लम्बा साँप दिखाई दिया।
तभी गलती से मैने एक पत्थर उसे दे मारा।
वो गुस्सा हो गया और मेरे पिछे पड़ गया।
मैँ भागा जितना भाग सकता था।
परँतु साँप मेरा पिछा ही नहिँ छोड़ रहा था।
इसने तो सभी देवी-देवता याद दिला दिए। ॥8॥

भागते-भागते मेरे सामने अचानक से एक बिल्ली आ गई।
Thank God!
बिल्ली ने साँप को देख लिया और झप से उसे पकड़ लिया।
बची जान॥
मैँ रास्ता भटक गया था कि अचानक एक भालू मेरे सामने आ गया।
मैँ पसीना-पसीना हो गया।
और बेहोँस होकर गिर पड़ा। ॥9॥

कुछ समय बाद मेने आँख खोलकर देखा।
तो हैरान रह गया कि मैँ सहि-सलाम हुँ।
क्योकिँ भालू सोए और अजीवीत को नहीँ खाता।
मेँ मस्ती मे जँगल-जँगल भटक रहा था;
परंतु मन

मे डर था कि कोई मुसिबत न आ जाए।
थोड़ी ही देर मेँ वो हो गया, जिससे मैँ डरता था।
मैने देखा कि अचानक मेरे सामने से एक दहाड़ता शेर आ गया।
शेर को देखते ही मेरी पेँट आगे से गिली और पिछे से पीली हो गई।
शेर ने मुझको देखते ही मुझ पर झपट पड़ा।
मैँ शेर के आगे और शेर मेरे पीछे।
मैँ शेर के आगे और शेर मेरे आगे।
हाय!
अब क्या होगा??? ॥10॥

तभी मम्मी की धीरी सी आवाज सुनाई दी।
कि “उठ जाओ बेटा! काँलेज नहिँ जाना है क्या?”

आशीष घोड़ेला

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