” मेरे शब्द मेरा हथियार ” – अमनदीप

” मेरे शब्द मेरा हथियार ” – अमनदीप

अगर मैं युद्ध में एक सिपाही होता तो मैं अपनी आखिरी सांस तक लड़ता। मैं हाथ में तलवार लिए होता तलवार से बूंद बूंद करके खून बह रहा होता। मैं एक खूंखार भेड़िए की तरह दुश्मन के सैनिकों के खून से खेल रहा होता। कुछ खून मेरे जख्मों से भी बह रहा होता। पर क्या करता, मैं एक सिपाही नहीं हूं, और ना ही मेरे हाथ में तलवार है। दिल में एक आग सी लग रही है। हाथ में इक कलम है अब मैं लफ्जों से लड़ने की कोशिश करूंगा। और अपने दर्द को शब्दों में बांधने की कोशिश करूंगा। शायद मैं खुद को कुछ शब्दों में कैद कर पाऊं।

–अमनदीप

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