मझे मेरा कल लौटा दो-सपना सिंह

मझे मेरा कल लौटा दो-सपना सिंह

अकेली सी हो गई हूं मै आज उदास सी लगाने लगी है जिंदगी अजनबी सी लगने लगी है हर खुशी ।
ना जाने वो वक़्त कब आएगा जब मेरे चेहरे पे मुस्कान होगी जब खुल के हसी मेरे चेहरे पे आएगी ।
आज अकेली सी हूं मै बीते कल याद आ रहे है जब सब मेरे पास होते थे जब छोटी सी छोटी चीज मै खुशी मिल जाती थी
आज सब कुछ है फिर भी उदासी छाई है।
इसी आजादी के लिए हम सबसे लड़ते चलते थे आज जब आजादी है फिर भी ना जाने क्यों अकेली हूं मै ना दिल मै खुशी है ना चेहरे पे मुस्कान है।
काश लौट जाती मै अपनी उस दुनिया मै जहा मै थी जहा थोड़ा सा वक़्त में मै कुश हो जाया करती थी आज वक़्त ही वक़्त है फिर। चहरे से मुस्कान गायब है या खुदा मझे मेरे बीते प लौटा दे मेरी हर खुशी मिल जायेगी।
आंखों में अस्क है पर रो भी ना पा री हूं । होंठो पे मुस्कान है पर हस भी ना पा री हूं हमराही बन के हो गई जिंदगी।
या खुदा रेहम कर मझे मेरे बीते वक़्त मै ला दे जहा मेरे मा का आंचल होगा पापा का प्यार होगा भाई का दुलार होगा मुझे मेरा कल लौटा दो आज यहां हो के भी ना हूं। मझे मेरा कल लौटा दो।

 

Sapna Singh

 

सपना सिंह
पटना, बोरिंग

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