मुझे माँ चाहिए-1-दीपक शर्मा

मुझे माँ चाहिए-1-दीपक शर्मा

आज फिर उसके साथ के पढ़ने वाले बच्चों ने उसका मजाक बनाया।क्योंकि उसके पास उनके जैसी नई और महंगी साईकल जो न थी।उसके साथ के सारे बच्चे अपनी-अपनी साईकल से स्कूल जाते।वो अकेला ही था अपनी क्लास में जो पैदल ही स्कूल जाता।आज उसे अपनी माँ पर बड़ा ही गुस्सा आ रहा था।वो अपने क्लास में हुई अपनी बेइज़्ज़ती की वजह नई साईकल को नहीं बल्कि अपनी माँ को मान रहा था।उसने कई बार अपनी माँ से नई साईकल लाने को कहा भी था,लेकिन उसकी माँ ने हर बार उसे यही कहकर बहला दिया कि वो जल्द ही उसे एक नई साईकल दिलवा देगी।पर आज वो अपनी माँ का कोई भी बहाना नहीं सुनेगा,क्योंकि आज क्लास में उसकी जो बेइज़्ज़ती हुई उसके बाद अब कोई गुंजाइश ही नहीं थी कि अब वो अपनी माँ का कोई भी बहाना सुने।उसने आज अपने मन में ये ठान लिया था कि या तो कल वो अपनी नई साईकल से स्कूल पढ़ने जायेगा या फ़िर वो कल स्कूल ही नहीं जायेगा।चाहे कुछ भी हो जाये।
कहानी जारी रहेगी…

 

 

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दीपक शर्मा 

उधमसिंहनगर, उत्तराखंड

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