मुझे माँ चाहिए-2-दीपक शर्मा

मुझे माँ चाहिए-2-दीपक शर्मा

.घर पहुँचते ही उसने अपना बस्ता कन्धे से उतार के पलंग पर डाल दिया और चादर ओढ़ कर लेट गया।अपने लाल का ऐसा बर्ताब देख वो समझ चुकी थी कि आखिर माज़रा क्या है?मगर वो भी बेचारी क्या करती?जब तक उसके पति ज़िन्दा थे तब तक उन दोनों ने अपने लाडले बेटे की हर इच्छा को पूरा किया।मगर न जाने उनके हँसते-खेलते परिवार को किसकी नज़र लगी,एक शाम अचानक उसके पति की तबियत बिगड़ गयी।जल्दी से वो अपने पति को एक प्राइवेट हॉस्पिटल में ले गयी।डॉक्टर ने उसे जो बताया उसे सुनकर उसकी आँखों के आगे अंधेरा सा छा गया।उसके पति को कैंसर था।और वो इसकी लास्ट स्टेज थी।डॉक्टर ने बताया कि आपके पति की ज़िंदगी बस 4-5 दिन की ही है
आप चाहें तो इन्हें घर भी ले जा सकती हैं।पर वो डॉक्टर की कोई भी बात मानने को तैयार ही नहीं हुई।उसने हर कोशिश की अपने पति की ज़िंदगी बचाने की।अब तक जितनी भी पूंजी थी उसके पास उसने सब पानी की तरह बहा दिया था,मगर वो अपने पति को बचा न सकी।

 

     

       

        दीपक शर्मा

उधमसिंहनगर, उत्तराखंड

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