Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

नाम कमाएगा बालक – वीरेंद्र देवांगन

जब मुझ अभागे के घर बेटा पैदा हुआ, तो मैं खुशी से झूम उठा। जश्न मनाया; मिठाई बाॅंटा; फटाखे फोड़ा।
वक्त गुजरता गया और मैं खेती-किसानी में मशगुल होता गया। फसलों की बुआई, निंदाई, गुड़ाई और कटाई; बैलों की सानी-पानी, खेतों में खाद और घर-गृहस्थी के जंजाल में इस कदर खोया कि मुझे पता ही नहीं चला कि बेटा कब दस बरस का हो गया।
एक दिन मैं गौर किया कि खेती के लिए लाया गया यूरिया बगैर इस्तेमाल के धीरे-धीरे कम दिख रहा है। ऐसे मौके पर नौकर पर शक होना था, जो मुझे हुआ। मैंने उससे जानना चाहा, तो वह गिड़गिड़ाकर बोला, ‘‘बाल-बच्चे मर जाएॅं; धरती निगल जाए; गर मैंने चोरी की है, तो।’’
पत्नी से पूछा, तो वह मुझपर ही बरस पड़ी, ‘‘क्या बकवास करते हो? खेत में खुद डाले आते हो और घर में कुहराम मचाते हो।’’
मैं हैरान था कि आखिर यूरिया जाता है कहाॅं? धरती निगलती है या आसमान ले उड़ता है! मैं इसी उधेड़बुन में था कि मैंने एक दिन देखा, मेरा लाडला भंडारगृह से कुछ चबलाता हुआ निकल रहा है। मुझे खटका हुआ। मैं फौरन भंडारगृह पहुंचा। वहाॅं देखा, तो आज फिर कुछ यूरिया कम दिखाई दिया। अब, मेरा शक यकीन में बदलने लगा कि हो-न- हो यही होनहार यूरियाखोर है।
पूछताछ करने पर उसने, जो कहा उससे मेरे होश फाख्ता हो गए, ‘‘मैं पिछले पाॅंच साल से यूरिया खा रहा हूॅं। पर खेद है कि ‘आम जनता की नाई’ आपको अभी पता चल रहा है। बड़ी कमजोर निगाह है आपकी; तभी तो परिवार, समाज संग देष का बंटाघार हो रहा है।’’
यह सुन थरथर कांपने लगा मैं। मेरे रोंगटे खड़े हो गए। कारण कि मैं सुन रखा था कि यूरिया मानव शरीर के लिए घातक होता है। वह स्लो पायजन का काम करता है। कच्ची दारू में मिलाने से यह दारू को तो तेज करता है, किंतु मानव शरीर के खून को पानी करने लगता है।
मैं उसे एक डाॅक्टर के पास लेकर गया। उनसे पूछा, ‘‘डाॅंक्टर साहब, यह इकलौता किसी ‘माननीय’ की नाई पाॅंच बरस से यूरिया डकार रहा है। कृपया इसका इलाज करें, जरा!’’
डाॅक्टर अनुभवी था। वह मुझे ऊपर से नीचे यूॅं धूरा, गोया कह रहा हो, ‘बौड़म हो तुम! घर का बालक एक सत्र से यूरिया खा रहा है और आपको हवा तक नहीं लग रहा है। ऐसे में क्या होगा इस लोकतंत्र का?’ पर वह यह कटु सत्य कह न सका। कहता, तो घर आए ग्राहक के रुठने का डर था।
बहरहाल, वह झटपट स्टेथेस्कोप उठाया। उसे बालक के थाती और पीठ पर लगाकर देखा। नब्ज टटोला। मुॅंह, जीभ और नाक का आंकलन किया। कॅंठ को हौले से दबाया। पश्चात् एक पर्ची पर चंद लकीरें उकेर कर बोला, ‘‘पहले ब्लॅड, यूरिन और स्टूल का टेस्ट कराओ; छाती और पीठ के एक्सरे लो; फिर रिपोर्ट लेकर आओ। तभी कुछ बता पाऊॅंगा।
जब ओखली में सिर दिया, तो मूसल से क्या डर? मै मरता क्या न करता; नालायक को लेकर पैथोलाॅजी गया। वहाॅं सैम्पल दिलवाया। तीन धंटे के बाद जब रिपोर्ट लेकर डाॅक्टर के पास पहुॅंचा, तो डाॅक्टर रिपोर्ट देखकर उछल पड़ा। रिपोर्ट को लहराते हुए बोला,‘‘ये तो कमाल हो गया। तुम कह रहे हो कि लाडला पाॅंच साल से यूरिया खा रहा है। पर रिपोर्ट कह रही है कि यूरिया भक्षण का लक्षण नहीं है।’’
यह सुन मैं सिटपिटाया। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि अब उन्हें यकीन कैसे दिलाऊॅं कि औलाद को इस क्षेत्र में महारत हासिल है। कहा, ‘‘हाथ कंगन को आरसी क्या? सामने है लड़का। पुष्टि कर लीजिए।’’
डाॅक्टर लड़के की ओर मुखातिब होते हुए मजाकिए लहजे में पूछा, ‘‘क्यों बेटा, सच्ची-सच्ची बता! तू खाता है ना यूरिया!’’
‘‘…और नहीं तो क्या? मैं यूरिया खाता हूॅं और खूब मजे से खाता हूूॅ। मुझे इसको खाने में बड़ा मजा आता है।’’ बालक बेझिझक बोल पड़ा, तो डाॅक्टर की हॅंसी छूट गई। हॅंसते-हॅंसते बोला, ‘‘ये हुई न मरदोंवाली बात। मेरे भानजे की तरह। मेरा भाॅंजा भी बचपन में खूब शक्कर खाता था। एक बार में ही किलो-किलो। मना करने पर रोता-चीखता-चिल्लाता था। पर बाद में फख्र हुआ कि वह सरकार में रहकर शक्कर खाने और उसे हजम करने का विश्व रिकार्ड बनाया है। उसने जिस ढंग से शक्कर घोटाला किया है, उसको करने के लिए बहुतों को कई-कई जनम लेना पड़ेगा।’’
मै डाॅक्टर का मुॅंह तकता रह गया,‘‘इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। जब देश के करप्ट लोग लोहा, सीमेंट, छड़, बाॅंध, पुल, सड़क, पनडुब्बी, खेल मैदान, चारा, वरदी और न जाने क्या-क्या खा-खाकर पचा रहे हैं और डकार तक नहीं ले रहे हैं, तो आपका लाल भी यूरिया खाकर मजे से पचा लेगा। मैं तो कहता हूूॅं कि यह उनसे बढ़-चढ़कर निकलेगा। क्योंकि जो बालक धाकड़ नेताओं की भांति ‘जांच रिपोर्ट’ तक को बदलवाने की हिम्मत व ताकत रखता है, वह बड़े-से-बड़ा घपला करके निरापद रह सकता है।’’ मैं अवाक सुनता रह गया।

                --00--

वीरेंद्र देवांगन, बोरसी, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
मोबाईल नं. 9406644012

123 views

Share on

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on email
Email
Share on print
Print
Share on skype
Skype
DishaLive Group

DishaLive Group

Hi, This account has articles of multiple authors. These all written by Sahity Live Authors, but their profile is not created yet. If you want to create your profile then send email to [email protected]

1 thought on “नाम कमाएगा बालक – वीरेंद्र देवांगन”

  1. भ्रष्टाचार पे जागरूकता के लिए एक नया कदम

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp