नाथूराम गोडसे हत्यारा थे आतंकवादी नहीं-सुजीत कुमार

नाथूराम गोडसे हत्यारा थे आतंकवादी नहीं-सुजीत कुमार

नाथूराम गोडसे इन्डिया में कभी ना भूलने वाले नामों में से एक है। जब – जब बापू का नाम आता है तो उनके हत्यारे के रुप एक नाम गूंजता है। वो है- नाथूराम गोडसे। ना कभी हम बापू को भूलेंगे और ना ही कभी उनके हत्यारे को पर जब से भारत में भगवा आतंकवाद, हिन्दु आतंकवाद का चर्चा चला है तो उदाहरण के रूप में हिन्दू आतंकवाद के रुप में केवल एक ही नाम आता है नाथूराम गोडसे का पर मैं पुरे हिन्दुस्तान से पूछना चाहूंगा कि नाथूराम गोडसे को आतंकवादी कहना कहा तक उचित है। क्या आपको लगता है कि वो आतंकवादी थे। और ये आतंकवादी होने का आरोप वहीं लगाते हैं जीन पर खुद आतंकियों को सपोर्ट करने का आरोप लगा होता है। वो ऐसे लोग होते हैं जो खुद भारत विरोधी ब्यान देते रहते हैं। जो हिन्दू मुस्लिम में फुट पैदा कर अपनी राजनीति चमकाते रहते हैं। हिन्दू आतंकवाद में नाथूराम गोडसे का नाम इका के कार्ड की तरह इस्तेमाल करते हैं। जब हिन्दू आतंकवाद का नाम छेड़ा है तो हिन्दू आतंकवादी का नाम भी तो देना होगा तो ये धड़ल्ले से नाथूराम गोडसे का नाम लेते हैं क्योंकि इस नाम के आलावा कोई और नाम मील ही नहीं सकता जिसे आतंकवाद के रुप में इस्तेमाल किया जा सके। पर हमें लगता है कि नाथूराम गोडसे को आतंकवादी कहना सरासर हिन्दूओं को बदनाम करने की साजिश है। हिन्दूत्वा पर आतंकवादी का ठप्पा लगाने का काम हो रहा है। मैं यहां नाथूराम गोडसे को महान बताने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा हूँ और ना ही उन्हें सही साबित करना चाह रहा हूं। वो हत्यारा थे और रहेंगे। इसके लिए उन्हें सजा भी मिली। आप इतना ही से समझे कि वो किस साजिश में फंसे थे- जब उन्हें मृत्यु की सजा मिली तो गांधीजी के पुत्र मणीलाल गांधी तथा रामदास गांधी उन्हें माफ करना चाहते थे क्योंकि वो जानते थे कि गोडसे कोई जाति दुश्मनी के लिए गांधी जी की हत्या नहीं की क्योंकि गोडसे गांधी जी के अन्नय भक्त था वो उनके विचारों में विश्वास करते थे पर उस समय हालत कुछ इस प्रकार हो गये थे कि उन्हें लगा कि गांधी हिन्दू विरोधी काम कर रहे हैं बंटवारे में हुए मौत के जिम्मेदार गांधी को मानते थे इसलिए उनकी हत्या कर दी। देखिये उस समय जो भी हुआ आपने इन्टरनेट किताबों में बहुत जगह पढे होंगे कारन जो भी हो हम उन्हें हत्यारा मानते हैं और मानना भी चाहिए पर गांधी पुत्र जब उन्हें माफी देना चाह रहे थे तो नेहरू, सरदार पटेल जैसे लोगों ने दलील को साफ इंकार कर दिया उन्हें मालूम था कि अगर गोडसे को माफ कर दिया गया तो गांधी के जीतने चाहने वालें है वो बुरा मान जायेंगे और वो बुरा मान गये तो हम कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पायेंगे। चुकी गांधी मुस्लिमों के लिए बहुत कुछ किये थे इसलिए वो भी गांधी के हत्यारे के सजा के पक्ष में थे। और इस प्रकार लोगों के दबाव और राजनीतिक फायदे के लिए उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया।
नाथूराम गोडसे पर मोहनदास करमचन्द गान्धी की हत्या के लिये अभियोग पंजाब उच्च न्यायालय में चलाया गया था। इसके अतिरिक्त उन पर १७ अन्य अभियोग भी चलाये गये। किन्तु इतिहासकारों के मतानुसार सत्ता में बैठे लोग भी गान्धी जी की हत्या के लिये उतने ही जिम्मेवार थे जितने कि नाथूराम गोडसे या उनके अन्य साथी। इस दृष्टि से यदि विचार किया जाये तो मदनलाल पाहवा को इस बात के लिये पुरस्कृत किया जाना चाहिये था ना कि दण्डित क्योंकि उसने तो हत्या-काण्ड से दस दिन पूर्व उसी स्थान पर बम फोड़कर सरकार को सचेत किया था कि गान्धी, जिन्हें बडी श्रद्धा से सभी लोग बापू कहते थे, अब सुरक्षित नहीं; उन्हें कोई भी प्रार्थना सभा में जाकर शूट कर सकता है।
इस घटना के बाद भी सरकार ने उनके सुरक्षा के लिए कुछ काम नहीं किया। और न्यायलय ने नाथूराम को हत्यारा मानकर सजा सुनाई थी न की आतंकवादी फिर वो आतंकवादी कैसे हो गये। गोडसे पर आतंकवादी होने का आरोप लगाने वाले लोगों से कहना चाहूंगा उन्हें देश के कानून और न्यायपालिका में तनिक भी विश्वास है तो नाथूराम गोडसे आतंकवादी नहीं हत्यारा थे। उन पर आतंकवादी होने का आरोप इसलिए भी लगता आया है क्योंकि वो RRS से जुड़े हुए थे। और यहां तो आजादी से पहले से ही RRS हिन्दु को बदनाम करने की साजिश हो रही हैं।

 

 

Sujeet Kumarसुजीत कुमार
हलिवन्ता,झारखण्ड

2+

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account