नारी – जयकृष्णा

नारी – जयकृष्णा

नारी नारी शब्द ही रहस्य है इश्क का अब तक कोई तोड़ नहीं है किंतु हमें पूर्वज द्वारा ज्ञात है कि सृष्टि के निर्माण के लिए ईश्वर के द्वारा नर नारी रूप की रचना की गई है तभी से नर के साथ-साथ नारी का अस्तित्व है अस्तित्व की बात है तो यह उल्लेखनीय है कि प्रकृति के अस्तित्व के लिए नारी का होना जरूरी है बिन नारी है जग सूना है नर-नारी प्रकृति की अद्भुत करिश्मा है प्रकृति ने सृष्टि करते समय दोनों को समान रुप से सृजित किया कहीं कोई भेदभाव नहीं किया नारी की शक्ति की विशालता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि भगवान भोलेनाथ मैं अनंत शक्ति होने के बावजूद अर्धनारीश्वर का रूप धारण किया पूरे जगत में दुर्गा रूपी नारी की पूजा की जाती है नारी कीसतीत्व की कथा बहुत ही प्रचलित है पुरुष के सतीत्व पत्नीत्व का कोई पैमाना X नहीं होती किंतु नारी की होती है इसी वर्गों में विभाजित किया जाता है पतिव्रता धर्म की अवहेलना करने पर उसकी अपेक्षा की जाती है सदियों से नारी के अस्तित्व की परीक्षा ली गई है परंतु पुरुष के प्रतिभागी प्रमाण के लिए कोई परीक्षा नहीं है यह भेदभाव नारी के साथ अनादिकाल से होता रहा हम यहां रामायण के कुछ अंशों का वर्णन करेंगे रामायण में माता सीता की सतीत्व की परीक्षा के लिए कई बार अग्नि परीक्षा ली गई 14 वर्षों तक रावण की कैद में रहने पर भी वह अपने सतीत्व की रक्षा करती रही तो फिर भी उसके अग्नि परीक्षा ले गए दुनिया के लिए उचित नहीं था

जयकृष्णा,
पूर्णिया बिहार

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