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नए युग में चैटिंग के द्वारा किया हुआ प्रेम का परिणाम-पूनम मिश्रा

बात उन दिनों की है जब मुझे नया नया कंप्यूटर मिला था और मैं ग्रेजुएशन की छात्रा थी मुझे कंप्यूटर पर नए-नए साइड देखना लोगों से बात करना बहुत अच्छा लगता था एक दिन मेरी फ्रेंड ने बताया कि तुम कंप्यूटर में लोगों से चैट कर सकती हो दोस्ती कर सकती हो अपने अच्छे मित्र बना सकती हो मैंने पूछा कैसे उसने कुछ साइड के नाम दिए जिसमें मैं लोगों से बात कर सकती थी कुछ दिन तक मैं भी रमेश नाम के लड़के से बात करना शुरू कर दी मुझे उससे बातें करते हुए तकरीबन काफी साल बीत गए तभी घर वालोने शादी की बात करने लगे मुझे रमेश में ज्यादा दिलचस्पी थी मैं किसी और से शादी नहीं करना चाहती थी मैंने अपने परिवार के लोगों को इसके बारे में जानकारी दें तो सभी मुझसे नाराज हो गए और कहने लगे कि यह ऑनलाइन प्यार कैसा होता है इसमें ना तुम उससे मिली हो ना तुम उसको देखी हो फिर भी तुम उससे शादी करना चाहती हो मैं हर हाल में रमेश से ही शादी करना चाहती थी मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी इसलिए वह मेरी बात को सहर्ष स्वीकार कर ली और लड़के के बारे में पूरी जानकारी लेने लगे जैसे उसके माता-पिता कहां के रहने वाले हैं वह क्या करता है कहां काम करता है बहुत सी जानकारियां उन्होंने ली पता चला कि रमेश मारीशस में काम करता है और उसके माता-पिता भी वही रहते हैं उसकी एक बहन मुंबई में रहती है रमेश ने अपनी बहन का नंबर दिया मैंने उससे बात किया मुझे बहुत अच्छा लगा फिर वह मुझसे मिलने मेरे घर आई मेरे लिए बहुत सा गिफ्ट लेकर आई थी मेरे मां-बाप से मिले सभी को अच्छा लगा मगर स्वाभाविक है माता पिता को अपनी बेटी की चिंता होती ही है इतना सब होने के बावजूद भी वे खुश नहीं थे और वह मेरी शादी उस व्यक्ति से नहीं करना चाहते थे जिसे उन्होंने देखा तक नहीं था चूकी उसकी बहन फोटो लेकर आई थी उसने फोटो में अपने पूरे परिवार का परिचय कराया फिर भी वह संतुष्ट नहीं थे मगर मेरी जिद के आगे वह राजी हो गए मेरी शादी हुई रमेश देखने में बहुत अच्छे और सभ्य इंसान थे मैं उनके साथ विदेश जाने लगी तब एयरपोर्ट पर मेरे पिताजी ने कहा बेटा पासपोर्ट वापस आने की टिकट बहुत संभाल के रखना अगर तुम्हें वहां कोई परेशानी होती है तो तुम बेहिचक इंडिया चली आना मेरा घर हमेशा तुम्हारे लिए खुला रहेगा मैं जब वहां पहुंची तो कुछ दिन तो सब कुछ अच्छा था 6 महीने के बाद मुझे यह एहसास होने लगा कि मेरे सास-ससुर मुझसे घर के सारे काम करवाना चाहते थे उसके अलावा वहां पर उनके खेती-बाड़ी का भी काम होता था जिसमें वह मेरा पूरा मदद लेते थे क्योंकि मुझे इतना काम करने का आदत नहीं था इसलिए मैं थक जाती थी और रमेश पूरे टाइम लैपटॉप पर बैठे काम किया करते थे कुछ दिन तक यह सब अच्छा लगा परंतु कुछ समय के पश्चात मुझे थकान होने लगी मैंने सोचा घर में रहने से अच्छा है मैं भी कहीं जॉब कर लूं मुझे एक बैंक में नौकरी मिल गई मेरी सास ससुर इस बात से बहुत नाराज थे कि मैं जॉब करने जा रही हूं परंतु रमेश ने हामी भर दी एक दिन जब मैं बैंक जा रही थी तो मैंने देखा कि रास्ते में रमेश किसी लड़की से हंस हंस के बातें कर रहे थे उस दिन तो मैं कुछ नहीं बोली चुपचाप बैंक चली गई फिर मैं घर आकर उनसे पूछे तो मुझ पर नाराज होने लगे और मुझ पर उलटे शक करने का इल्जाम लगाने लगे एक दिन मैं अपने ऑफिस से निकल कर रमेश के ऑफिस में पहुंच गई वहां मैंने देखा कि रमेश केबिन में किसी लड़की के साथ बात कर रहे थे वहां के आफिस के लोगो से मैंने जब बात कि उनके कलीग ने बताया यह तो उनकी पुरानी प्रेमिका है इसका तो कई सालों से चक्कर चल रहा है यहां पर तो ऐसे ही चलता रहता है आप बाहर से आए हैं इसलिए आप इस माहौल में अपने आप को एडजस्ट नहीं कर पा रही हैं रमेश तो शुरु से ही ऐसे ही है इसका कई लड़कियों के साथ अफेयर रहा है आप कैसे इसके चंगुल में फंस गई जब मैं घर आई तो इस बात पर मेरी रमेश से बहुत लड़ाई हुई रमेश ने मुझ पर हाथ उठा दिया तीन चार थप्पड़ मारे और मैं बेहोश होकर लुढ़क गई सुबह जब मुझे होश आया तब मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा था और मैं सांस की तेज तेज आवाज आ रही थी घर के कामों में देर हो चुका था मैं तुरंत उठी घर के सारे काम निपटा करके बैंक जाने लगी और मैंने मन में निश्चय कर लिया कि आज मैं भारत जाने का टिकट कटवा लूंगी और मैं अपने देश चली जाऊंगी क्योंकि मैं जिस व्यक्ति पर भरोसा करके यहां आई थी वही मुझे नहीं समझता वही व्यक्ति मेरा अपमान कर रहा है तो इस देश में यहां के लोगों के साथ रहने का क्या मतलब है जब मैं भारत पहुंची अपने पापा के घर पहुंची तब वह मुझे देख कर के बहुत भौच्के हो गए मैं वहां जा कर के अपने मां बाप से लिपट कर बहुत रोइ और अपने किए पर पछतावा हो रहा था कि मैंने अपनी दुर्दशा स्वयं की है मेरी इस दशा की हालत के जिम्मेदार मैं खुद हूं कोई और नहीं है मैंने अपना कंप्यूटर फिर उठाया और मैंने रमेश ईमेल किया अब मैं तुम्हारे जीवन में कभी नहीं आऊंगी आज से तुम्हारा मेरा संबंध खत्म और उसने मेरे ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया अब मैं पुनः भारत में नौकरी करती हूं और जिंदगी को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हूं जो गलती मैंने कंप्यूटर के द्वारा चैटिंग करके की और अपनी जिंदगी को खराब किया वह गलती कोई भी ना करें क्योंकि ऑनलाइन प्रेम जैसी कोई चीज होती ही नहीं है मां-बाप की बात सुननी चाहिए उनके इच्छा अनुसार ही अपने जीवन से जुड़े फैसले लेनी चाहिए

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