पिड़ित शिक्षित वर्ग-दिव्यानि पाठक

पिड़ित शिक्षित वर्ग-दिव्यानि पाठक

अब तो मूल्यवान होकर भी बेकार मैं घर बैठना पड़ता हैं।दुषित राजनीति मैं बहुमूल्यवान युवाओं को पिसना पड़ता हैं।भ्रष्टाचार में रत नेता क्या जाने कि इन युवाओं को किस दौर से गुजरना पड़ता हैं।।ज्ञान कौशल युक्त अनेक युवाओं को अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ता हैं।तभी तो समाज मैं इतना अपराध बढता हैं।हर पल तिल तिल कर जीना पडता हैं।योग्यजनो को अपने वजूद हेतु भटकना पड़ता हैं। जैसे भुखे शेर की उपयोगिता होती हैं भोजन वैसे ही योग्य युवाओं की उपयोगिता होती हैं। उनके ज्ञान कौशल के अनुसार पद की प्राप्ति । यदि योग्य पद नही मिल पाते हैं। तो युवा अपने आप को क्षति पहुँचाते हैं। या समाज को क्षति पहुँचाने मैं अपनी भागीदारी निभाने पर मजबूर होते हैं।

 

Divyani Pathak
   दिव्यानि पाठक
            सेहोर,माधियप्रदेश

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