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रोमांचक कहानीः टेªन हाईजेकिंग-वीरेंद्र देवांगना

रोमांचक कहानीः
टेªन हाईजेकिंग
कुम्हारी के पेट्रोल पंप व्यवसायी विजयचंद के अपहरण का आरोपी महेंद्र सिंह उर्फ झबरा है। यह शख्स बिहार में अपहरण उद्योग चलाता था, जो दुर्ग के केंद्रीय जेल में कैद था।
व्यवसायी अपहरण कांड का फैसला 23 मई 2007 को सुनाया जाना था। 22 मई की दरम्यानी रात आरोपी महेंद्र सिंह जेल की दीवार फांद कर फरार हो गया। दीवार फांदने के लिए उसने लोहे के रिंग लगी रस्सी व बिजली के खंबे पर चढ़नेवाले सीढ़ी का इस्तेमाल किया।
दुर्भाग्य से जेल की दीवार फांदने के करीब तीन माह बाद वह दिल्ली में पुलिस के हत्थे चढ़ गया। तत्पश्चात उक्त अपहरण मामले में बिलासपुर के सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काटने लगा। बिलासपुर सेंट्रल जेल में रहकर उसने टेªन हाईजेकिंग का प्लान अपने साथियों के साथ मिलकर बनाया।
जेल फांदने के मामले में उसका प्रकरण विचाराधीन था, जिसकी पेशी के लिए उसे बिलासपुर से दुर्ग-न्यायालय लाया जाता था।
एक दिन पेशी के उपरांत प्रधान आरक्षक व आरक्षक उसे जनशताब्दी एक्सप्रेस से बिलासपुर ले जा रहे थे। पावर हाउस-भिलाई व कुम्हारी के बीच सिरसा गेट के पास कुछ युवक टेªन की चेन पुलिंग कर उसके इंजन में सवार हो गए।
वे युवक टेªन के चालकद्वय की कनपटी में रिवाल्वर तानकर उनसे मारपीट करने लगे। वे ट्रेन को हाईजेक कर उसके लोको पायलट को अपने हिसाब से चलाने के लिए रिवाल्वर के दम पर हुक्म फरमाने लगे। उन्होंने रेल को कैवल्यधाम-कुम्हारी के पास जबरिया रुकवाया।
उधर महेंद्र के कोच में सवार दीगर आरोपियों ने महेंद्र सिंह को छुड़ाने के लिए संधर्ष करने लगे। उन्हें हथकड़ी की चाबी नहीं मिलने पर वे सिपाही की आंखों में मिर्ची पावडर डालकर महेंद्र को हथकड़ी सहित ले भागे।
वे पाटन रोड की ओर फरार थे। रास्ते में उन्हें आई-20 कार मिला, जिसे उन्होंने रोका। वे कार पर सवार तीन व्यक्तियों की कनपटी पर कट्टा टिकाकर कार और मोबाइल लूट लिए। फिर वे उसी में सवार होकर पाटन की ओर भागे। इस बीच जब पुलिस को पता चली कि वे पाटन रोड में हैं, तो उन्होंने तगड़ी नाकेबंदी कर दी।
पुलिस को देखकर वे हड़बड़ा गए और हड़बड़ाहट में कार सहित भागने लगे। पुलिस ने उनका जमकर पीछा किया। वे यह देखकर और घबरा गए। कार की गति सामान्य से ज्यादा होने से उनकी कार पाटन अभनपुर मार्ग पर ग्राम खम्हरिया के निकट एक मोड़ के पास पलट गई। इसके बाद आरोपी इधर-उधर पैदल ही भागने लगे।
पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया। सघन तलाशी में दो आरोपी पकड़े गए। दुर्धटनाग्रस्त कार से एक मोबाईल मिला। पकड़े गए दो आरोपियोें की शिनाख्ती पर शेष 8 आरोपी भी पुलिस की गिरफ्त में आ गए, जिसमें महेंद्र का पुत्र भी था, जो नाबालिग था। महेंद्र सिहं लगभग डेढ़ माह बाद धनबाद झारखंड में दबोचा गया।
इस हाईप्रोफाइल मामले में फैसला आने में पांच साल लग गए। न्यायालय ने प्रकरण मंे टिप्पणी की कि यह गंभीर प्रकृति का सामाजिक अपराध है। इसे बढ़ावा देने से रोकने के लिए आरोपियों को दंडित किया जाना जरूरी है।
इसमें सभी आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। आरोपी महेंद्र सिंह को छोड़कर सभी आरोपियों की सजा साथ-साथ चली। अर्थदंड अदा नहीं करने पर सजा एक के बाद एक भुगतना पड़ा।
आरोपी महेंद्र को आजीवन कारावास के अतिरिक्त 7 वर्ष की सजा अलग से भुगतनी पड़ी। नाबालिग आरोपी के विरूद्ध पृथक प्रकरण बाल न्यायालय में विचाराधीन है।
उल्लेखनीय यह भी कि आरोपी महेंद्र को धनबाद-झारखंड में गिरफ्तार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले प्रधान आरक्षक को आउट आफ टर्न प्रमोशन देने की प्रक्रिया शुरू की गई।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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