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स्वप्न परी-प्रदीप-निर्मल

टिम – टिम करती तारो मे से , उतरी नन्ही सी प्यारी परी
चाँद जैसे मुखड़ा है उसका , हाथो में एक जादू की छड़ी
रंग -बिरंगे पंख सुनहरे , मन को खूब हर्षित हैं करते
बैठ हिंडोला गगन से आती , सुंदर सा एक दृश्य बनाती
मेरे भी पंख होते अगर , नभ मे संग उड़ जाती मैं
नानी मेरी बहुत ही प्यारी , दूध बताशा हमें खिलाती
थपकी देकर हमे सुलाती , राजा- रानी की कहानी सुनाती
परी जो मेरे पास है आती , ढेर सारे खिलौने है लाती
मेरे ऊपर छड़ी घुमाती , नींद भरे ख्वाबो से जगाती
जब मेरी आंखे है खुलती , मम्मी मेरी पास है रहती ।

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