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स्वप्न परी-प्रदीप-निर्मल

टिम – टिम करती तारो मे से , उतरी नन्ही सी प्यारी परी
चाँद जैसे मुखड़ा है उसका , हाथो में एक जादू की छड़ी
रंग -बिरंगे पंख सुनहरे , मन को खूब हर्षित हैं करते
बैठ हिंडोला गगन से आती , सुंदर सा एक दृश्य बनाती
मेरे भी पंख होते अगर , नभ मे संग उड़ जाती मैं
नानी मेरी बहुत ही प्यारी , दूध बताशा हमें खिलाती
थपकी देकर हमे सुलाती , राजा- रानी की कहानी सुनाती
परी जो मेरे पास है आती , ढेर सारे खिलौने है लाती
मेरे ऊपर छड़ी घुमाती , नींद भरे ख्वाबो से जगाती
जब मेरी आंखे है खुलती , मम्मी मेरी पास है रहती ।

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Pradeep-Nirmal

Pradeep-Nirmal

मै प्रदीप कुमार निर्मल प्रयागराज. उत्तर प्रदेश का निवासी हूं। मेरे पिता स्व. श्री शिव प्रसाद निर्मल एवं माता का नाम श्री मती ए.के निर्मल । मुझे बचपन में ही महान लेखक डा. रघुवंश, दूसरी मीरा के नाम से प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा जी एवं भारत की प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री मती इन्दिरा गांधी से मिलने का सौभाग्य मिला। मेरे पिताजी भी लेखक थे जिनकी प्रेरणा से प्रेरित होकर मैं भी उपन्यास और कविता लिखने का कार्य कर रहा हूं। मैने गब्बर का प्रयश्चित उपन्यास भी लिखआ हुआ है। किशोरो के लिए बीफोर मैरिज सेक्स एजुकेशन से सम्बंधित पुस्तक भी लिखी गई है, जिसका विमोचन 2004 में जनपद कौशाम्बी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं द्वितीय संस्करण का विमोचन 2013.में अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रयागराज मंडल द्वारा किया गया। 2000 में मेरा विवाह हुआ। मेरे 2 पुत्र है। मेरी पत्नी का नाम श्री मती रमा देवी है। मैं बचपन से समाजसेवी रहा हूं।

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