शिक्षत युवा वर्ग की समस्या-पुष्कर कुमार

शिक्षत युवा वर्ग की समस्या-पुष्कर कुमार

जिस युवा शक्ती के लिए भारत विश्व मे जाना जाता है ,उसी युवा वर्ग की स्थति बहुत ही दैनिय होता जा रहा है। श्रमिक वर्ग तो शारीरीक काम कर किसी तरह अपना जिवन चला ही लेते है ,लेकिन शिक्षित वर्ग के लिए एक समस्या का विषय बना हुआ है । क्योंकि जीविका के अभाव में शारीरीक और मानसिक व्याधियो का शिकार बनता जा रहा है ,साथ ही शारीरीक श्रम से विमुख परंपरागत पेशे मे झिझक का अनुभव कर रहे है ।
किसी भी विकाशील देश के लिए कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसके शिक्षित युवा पिढ़ी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद छोटी सी नौकरी के लिए लालायित रहते है ,121 करोड़ की हमारे देश की जनसंख्या मे रेलवे डी ग्रेट और लोको-पायलट में 89409 पदो के लिए 2.37 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए , बिहार में ,बिहार पुलिस के लिए 9500 पदो हेतु 11 लाख आवेदन प्राप्त हुए, सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश मे विधान सभा सचिवाले के भृत्य के महज 368 पदो के लिए 23 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। सबसे बड़ी बात तो यह है,कि चपरासी की भी अगर नौकरी आती है ,तो उसमें भी ढ़ेर सारा आवेदन प्राप्त होते है, और इसमे उच्च शिक्षा प्राप्त युवा भी कतार मे खड़े हो जाते ,जिसमें सबंधित विभाग भी समंजस्य में पड़ जाते है ,कि इसे किस प्रकार नियुक्त किया जाए ।
शिक्षित वर्ग की बेरोजगाड़ी की समस्या पर प्रकाश डालते हुए लखनऊ में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने कहा था- ”हर साल लगभग नौ-दस लाख पढ़े-लिखे लोग नौकरी के लिए तैयार हो जाते हैं, जबकि हमारे पास मौजूदा हालात में एक सैकड़े के लिए भी नौकरियाँ नहीं हैं ।”
उपर्युक्त कथन से स्पष्ट होता है कि माँग से अधिक जनसंख्या को होना ही शिक्षित वर्ग के लिए समस्या का मूल कारण है।
सच तो यह है कि उच्च शिक्षा प्रप्त कर रहे युवा IASऔर PCS के निचे सोचते तक नही ,यही हाल हाई स्कूल पास युवा वर्ग की भी है ,यह सब-इंपेक्टर और रेलवे आदी के दरवाजा खटखटाते है । लेकिन जैसे ही कॉलेज की पढ़ाई खत्म होती है छोटी-छोटी नौकड़ीयों में भी आवेदन करते रहते है । कईयो के यहाँ तो बड़े पैमाने पर खेती होती है ,शिक्षा का सदुपयोग कर वैज्ञानिक तरीके से खेती करे तो आर्थिक स्थीति के साथ ही अनाज की समस्या भी खत्म हो जाएगी ।
सरकार की ओर से भी शैक्षनिक संस्थान मे ध्यान देकर पढ़ाई की व्यवस्था मे सुधार लाया जाए ,स्कूल और कॉलेज में थ्योरी की जगह पर, प्रायोगिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए ,उनकी स्कील का विकास किया जाए ,छोटे-छोटे कुटीर उद्योग खोला जाए, जिससे युवा नौकरी माँगने वाला नही ,देने वाला बन सके ।

 

Pushkar Kumarपुष्कर कुमार
 दियारी,अररिया

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