इश्क की आशिकी-मुनमुन सिंह

इश्क की आशिकी-मुनमुन सिंह

एक बार कीं बात है ।एक गाँव में एक परिवार में चार सदस्य थे ।माता -पिता और भाई -बहन थे ।लड़के का नाम राजविर था ।वह बहुत गरीब था ।लेकिन राजविर बहुत अवारा था ।वह पढ़ाई भी अच्छे से नहीं करता था ।वह अपने बगल के विद्यालय में अपने गाँव के एक लड़की के साथ पढ़ा करता था ।उस लड़की का नाम सबनम था ।सबनम पढ़ने में अच्छी थीं ।दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे ।सबनम पढ़ने के लिये दूर कालेज में चली गयी ।राजविर घर पर ही पढ़ता था । जब सबनम कालेज में पढ़ने के लिये दूर चली गयी थी ।तब राजविर का मन नहीं लगता था ।राजविर कुछ दिन बाद उसके कालेज गया ।इस बीच वह उससे प्रेम हो गया ।राजविर को भी उस समय दीवानीगी कालेज असर छाँव गया था ।
सबनम को भी आशिकी का असर छाँव ‘ गया था ।सबनम भी उसके साथ चार साल इश्क में डुबी थी ।जब उसे दिवानीगि काअसर
छुटा ।उसे पढ़ने का जुनुन का छाँ गया था ।वह राजविर को छोड़ दी ।वह पढ़ाई में जुट गयी ।फिर भी उसे अपने पर उपरोक्त जुनुन था ।वह उसे छोड़ दिया ।वह फेसबुक पर कुछ बातें उसके प्रति गलत डालने लगा । सबनम को फिर भी उसके प्रति कोई इस बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा ।वह अपनी पढ़ाई में पुरी तरह जुटी थीं ।अभी भी राजविर केवल अपनी सुरत पर घमंड करता था ।अंत में वह सबनम नौकरी करने लगती हैं ।राजविर गरीब से गरीब ही रह जाता हैं ।चढ़ गया था दिवानीगि का असर।।
दोनों थे आशिकी में ।
दिये थे पढ़ाई से भी नाता तोड़ ।

 

             मुनमुन सिंह

         चक्ररामपुर,मीरजापुर

 

 

 

 

 

 

 

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