स्वाथ्य सबसे बड़ा धन है – प्रणय कुमार

स्वाथ्य सबसे बड़ा धन है – प्रणय कुमार

किसी गाँव में एक आलसी पुरुष रहता था | वह अपने खेत-पतार को छोर कर
घर में बैठा रहता था | उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी, इसलिए वह
बैठे–बैठे ही अपना घर चलता था |
महीने बीत गए मगर उसका आलस नहीं गया | उसके आलस के बारे में गाँव
के सभी लोग जानते थे, मगर उसकी कोई मदद नहीं कर पाते थे |
एक दिन शहर से एक व्यक्ति गाँव आया | उसने उस आलसी पुरुष के बारे में
सुना, उसे लगा कि उसे कोई कदम उठाना चाहिए; जिससे वह आलसी पुरुष
सही रास्ते पर आ जाए और अपने काम को समझे | उस व्यक्ति को एक उपाय
सूझी, वह आलसी पुरुष से मिलने गया |
“मित्र तुम ऐसे बेकार घर पर क्यों बैठे रहते हो? तुम्हें तो रोज अपने खेत
जाना चाहिए तुम्हरा खेत तो सोना उगलता है,” शहर से आए व्यक्ति ने कहा |
इस बात को सुनते ही आलसी पुरुष आश्चर्य से बोला,
“कब! कहाँ! और कैसे उगलता है मेरा खेत सोना!”
“जब मैं सूरज उगने से पहले तुम्हारे खेत के रस्ते से गुजर रहा था–लगभग
प्रातः 4 बजे, मैंने देखा कि तुम्हारे खेत के अंतिम छोर पर सूर्य की लालिमा परते
ही सोना निकलने लगा, यह क्षण भर का समय था और सोना पुनः अद्रश्य हो
गया |”

दुसरे ही दिन आलसी पुरुष प्रातः अपने खेत के लिए निकला परा | घर पर
बैठे रहने और कोई काम न करने की वजह से उसके पैरों ने आघे रस्ते में ही जवाब
दे दिया | वह सही समय पर खेत नहीं पहुँच पाया | चुकी उसे धन से लगाव था,

इसलिइए उसने हार नहीं मानी और पुनः दुसरे दिन प्रातः ठीक समय पर खेत के
लिए निकल गया | आज उसने पहले दिन के मुकाबले ज्यादा दूरी तय की, मगर
आज भी वह खाली हाथ घर लौटा, क्योकि आज भी वह सही समय पर नहीं
पहुँच सका था |
ऐसे ही कई दिन बीतता चला गया और वह खली हाथ घर लौटता रहा,
मगर उसने हार न मानी; क्योकि उसका घ्यान उन स्वर्ण मुद्राओं पर था | लालच
के चलते वह अपने खेत जाने लगा |
एक दिन ऐसा आया जब वह सही समय पर अपने खेत पहुँच गया | उसने
देखा कि शहरी व्यक्ति वहीं खड़ा था, मगर दूर–दूर तक सोना दिखाई नहीं दे रहा
था |
“कहाँ है सोना? तुमने तो कहा था कि इस वक्त मेरा खेत सोना उगलता है,”
आलसी पुरुष गुस्से में बोला | शहर से आया व्यक्ति मुस्कुराया और बोला,
“स्वर्ण मुद्राओं का धन तो तुम्हारे पास पहले से ही है, मगर सच्चे धन की
प्राप्ति तो तुम्हें अब हुई है |”
आलसी पुरुष के माथे पर सूर्य की लालिमा चमक रही थी |

प्रणय कुमार
कुर्सेला, कटिहार (बिहार)

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