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Maheshwar Uniyal Uttarakhandioffline

  • India, Haridwar
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  • Maheshwar Uniyal Uttarakhandi changed their profile picture 2 weeks, 1 day ago

  • मौत की अनदेखी

    मौत की अनदेखी

    अटल सत्य है
    जो दुनिया में
    हर पल, पथ पर
    खड़ी सामने
    इंतजार में बैठी है
    झुठला नहीं पाया
    है कोई इसको
    यह तो सदैव
    साथ में ही रहती है ll

    मानव चाहे
    जितना भूले
    पर एक दिन
    याद दिलाती है
    आने का कोई
    समय नहीं है
    यह जब चाहे
    आ जाती है…

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  • तेरी दीवानी

    “तेरी दीवानी”

    पनघट पर पहली बार
    मिली थी वह मुझसे यार
    तीर चले नैनो के पार
    हो गया था मुझको प्यार ||

    वो लेने आई पानी थी
    क्या मस्त भरी जवानी थी
    वो मेरे सपनों की रानी थी
    यहीं से शुरू हुई कहानी थी ||

    उसको पाने की…

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  • “कब तक सोएगा”

    “कब तक सोएगा”

    उठ जा अब तो
    तू कब तक सोएगा
    सुबह हो गई
    सूरज खिड़की से
    अंदर झांक रहा
    लोग कितने आगे
    निकल गए हैं
    तू भी निकल पड़
    वरना जीवन पर
    बैठकर रोएगा ll

    कुछ है अभी भी
    जो बेखबर है
    समय की रफ्तार से
    कुछ और भी है
    जो सब…

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  • “अपशगुन”

    “अपशगुन”

    पप्पू जो अभी-अभी मैट्रिक की पढ़ाई कर रहा था पढ़ाई में तो जरा सा कमजोर था लेकिन धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर अधिक विश्वास रखता था मेहनत से ज्यादा अपने भाग्य पर भरोसा…

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  • “कुर्सी की सनक”

    “कुर्सी की सनक”

    नेताजी तुम आइए
    पधारिए, बैठ जाइए
    कुछ तो फरमाइए !
    नहीं, कुछ नहीं
    मुझे तो बस कुर्सी चाहिए ll

    पहले सब्र तो लाइए
    थोड़े ठंडे हो जाइए
    कुछ खाना-वाना खाइए
    अपने हाल-चाल बताइए !
    नहीं, कुछ नहीं
    मुझे तो बस कुर्सी चाहिए ll

    सर्दी की धूप…

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  • “कलमकार”-महेश्वर उनियाल

    “कलमकार”

    मैं एक निश्छल निर्विरोध
    जागृत नवाचार हूं
    लिखता हूं वही जो दिखता है
    क्योंकि मैं एक कलमकार हूं ll

    लेखनी शक्ति है मेरी
    लेखनी भक्ति है मेरी
    मैं एक अविरल धार हूं
    लिखता हूं वही जो दिखता है
    क्योंकि मैं एक कलमकार हूं ll

    कल्पना तक सीमित नहीं…

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  • “दर्द अपनों से “

    “दर्द अपनों से ”

    सताए चाहे दुनिया जितनी
    फिर भी हम हंस लेते हैं
    अपनी आस्तीन में पलने वाले
    सांप ही डस लेते हैं ll

    धन-संपत्ति सब कुछ बांटी
    बस अपने ही लड़कों में
    आज ठोकरें खा रहे हैं
    मां-बाप खुली सड़कों में ll

    क्या क्या कष्ट नहीं…

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  • “आखरी खत”

    आखरी खत

    तुझे लिखा वो आखरी खत
    आज भी मेरी डायरी में है
    कहते हैं सुनने वाले कि
    तेरा दर्द मेरी शायरी में है ll

    गुमनाम के अंधेरे में
    मैं तो खो चुका हूं पूरा
    अब मुनासिब नहीं है रोना
    क्योंकि मैं रो चुका हूं पूरा ll

    संभाल…

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  • #क्या क्या बुलाती है”

    #क्या क्या बुलाती है”

    मैं कहता हूं अपना चांद उसे
    पर वह मुझे चंद्रग्रहण बुलाती है
    मैं कहता हूं घर का रोशनदान उसे
    पर मुझे टूटा फूलदान बुलाती है ll

    मैं मोरनी कहता हूं उसे
    पर वह मुझे उल्लू बताती है
    मैं कहता हूं जान…

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  • धरती मां

    धरती मां

    धरती मां तुझे नमन करूं मैं
    तू जीवन आधार है
    अस्तित्व नहीं है तेरे बिना
    तुझसे ही संसार है ll

    गर्भ से तेरे ज्वाला निकले
    नभ से तेरा नाता है
    प्राणवायु तू ही देती
    नीर भी तुझसे आता है ll

    प्रकृति की तू है मूरत
    तेरा…

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  • धरती मां

    धरती मां

    धरती मां तुझे नमन करूं मैं
    तू जीवन आधार है
    अस्तित्व नहीं है तेरे बिना
    तुझसे ही संसार है ll

    गर्भ से तेरे ज्वाला निकले ज्वाला निकले
    नभ से तेरा नाता है
    प्राणवायु तू ही देती
    नीर भी तुझसे आता है ll

    प्रकृति की तू…

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  • “मजदूर”,वह मजबूर नहीं

    “मजदूर”

    वह मजबूर नहीं
    मौलिक मजदूर है
    है गरीब बेशक
    पर इस धरा का नूर है ll

    करके कठिन परिश्रम जिसने
    देह को पिघलाया है
    ऐसा मनोहर सुंदर सृजन
    इस जगत में हो पाया है ll

    कर्म सदैव धर्म है जिसका
    माटी का वह पूत है
    धैर्य, साहस है गहना…

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  • “सुबह सवेरे”

    बाल कविता

    “सुबह सवेरे”

    हुआ सवेरा चुन्नू मुन्नू
    मोना को जगाते हैं
    बंद पड़ा है दरवाजा
    घर की घंटी बजाते हैं ll

    सुनकर घर की घंटी मोना
    दौड़े-दौड़े आती है
    देख के सारे बच्चों को वह
    गुड मॉर्निंग चिल्लाती है ll

    सुबह सवेरे सैर सपाटा
    करने को वो…

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  • Maheshwar Uniyal Uttarakhandi changed their profile picture 1 month ago

  • Maheshwar Uniyal Uttarakhandi changed their profile picture 1 month ago

  • कोरोना वारियर्स

    कोरोना का संकट देखो
    आ पड़ा है देश में
    साक्षात भगवान घूम रहे हैं
    कोरोना वारियर्स के वेश में ll

    सफेद कोट में खड़ा कोई
    डॉक्टर के रूप में
    कोई खाकी वर्दी पहने
    निकला तपती धूप में ll

    खबरें इकट्ठा करके कोई
    जगा रहा जमाने को
    झाड़ू लेकर…

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  • “समतौण” एक बुढ़ड़ी बोलण लगी

    एक बुढ़ड़ी बोलण लगी, कि
    यूंकि सुख-सुविधाऐं सबा गाड़ा बगी
    कोई कासी कि ना सुणदो
    ये जमाने पार कणी आग लगी।

    एक जमानो सो तो जब
    सास ससुर की दाल ना गलेती
    बेटा ब्वारी की ते क्या मजाल
    भीतरे केवल सासुआ की चलेती।

    अब की ब्वारी ते…

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